गगरेट (ऊना)। अवैध खनन की मार झेल रही स्वां नदी अब औद्योगिक प्रदूषण की चपेट में भी आती नजर आ रही है। गगरेट क्षेत्र के जीतपुर बेहड़ी स्थित एक ईपीएस (थर्मोकोल) उद्योग पर एक बार फिर नदी के बहाव क्षेत्र में थर्मोकोल अपशिष्ट फेंकने के आरोप लगे हैं।
मामला सामने आने के बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उद्योग विभाग ने संबंधित उद्योग को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योग से निकलने वाला अनुपयोगी थर्मोकोल कचरा समय-समय पर स्वां नदी के किनारे और बहाव क्षेत्र में डाला जाता है। बरसात के दौरान यही कचरा पानी के साथ बहकर कई किलोमीटर तक फैल जाता है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित होने के साथ-साथ जलीय जीवों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार ईपीएस यानी थर्मोकोल जैविक रूप से आसानी से नष्ट नहीं होता।
यह लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है और धीरे-धीरे छोटे-छोटे कणों में बदल जाता है। ये कण पानी और मिट्टी को प्रदूषित करने के साथ-साथ पशु-पक्षियों और जलीय जीवों के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं। मामला सामने आने के बाद उद्योग विभाग ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो स्वां नदी का पर्यावरणीय संतुलन और अधिक प्रभावित होगा।
उद्योग विभाग के कनिष्ठ अभियंता गुरप्रीत सिंह ने बताया कि संबंधित उद्योग को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। उद्योग से पूरे मामले में स्पष्टीकरण तलब किया गया है और जवाब मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।