सिंचित इलाकों के किसानों ने मक्की की फसल बिजाई को लेकर बीज की खरीद शुरू की
अधिकतर किसान निजी दुकानों से खरीद रहे बीज
कृषि विभाग के पास अभी नहीं पहुंची बीज की खेप, किसान इंतजार में
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में गेहूं की कटाई 80 प्रतिशत तक हो चुकी है। अब किसान आगामी फसलों की ओर ध्यान दे रहे। सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में मक्की की अगेती फसल की बिजाई का दौर शुरू हो गया है। इसके लिए किसान पहले जमीन की सिंचाई कर रहे हैं और उसके बाद खेत में पर्याप्त नमी आने पर बिजाई कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ऊना के मैदानी और सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में करीब 500 हेक्टेयर जमीन पर मक्की की अगेती फसल तैयार होती है। यह फसल दो माह के लिए होती है। इसके बाद फसल के दानों को निकालकर सुखाया नहीं जाता। बल्कि नमी के भरपूर दानों को ही मंडियों में बेच दिया जाता है। इन दानों की सबसे अधिक मांग पोल्ट्री इंडस्ट्री में रहती है। हाथों हाथ इस फसल को किसान से घर द्वार पर ही खरीद लिया जाता है। उधर, जिला कृषि विभाग के पास अभी मक्की के बीज नहीं पहुंचे हैं। इससे किसान अगेती फसल की बिजाई के लिए निजी दुकानों से महंगे बीज खरीद रहे हैं।
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कई किसानों का हरी सब्जियों की ओर रुझान
कई किसान हरी सब्जियों को उगाने में तरजीह दे रहे हैं। बैंगन, भिंडी, खीरा, घीया, कद्दू, हरी मिर्च और करेला जैसी फसलें भी इन दिनों में ही उगाई जाती हैं। ऊना-संतोषगढ़ सड़क मार्ग के किनारों पर बसे गांवों में सबसे अधिक हरी सब्जी तैयार होती है। इसके अलावा हरोली क्षेत्र के कई गांवों और स्वां नदी के किनारों पर भी हरी सब्जियां बड़े स्तर पर उगाई जाती हैं। ये फसलें अगेती मक्की के एक बेहतर विकल्प के तौर पर उभरी हैं।
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जिला में मक्की की अगेती फसल का दौर शुरू हो गया है। इसके लिए किसान बिजाई से पहले सिंचाई कर रहे। यह फसल दो माह में तैयार होती है। जबकि गैर सिंचित इलाकों में बरसात को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक खेती करते हैं। कृषि विभाग के पास जल्द फसलों से जुड़े बीज उपलब्ध होंगे। अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि विभाग अधिकारियों व कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग