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Una News: भाइयों की कलाई पर बहनें बांधेंगी दाल और चावल की राखी

Mon, 28 Jul 2025 12:22 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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स्वयं सहायता समूह की ओर से बनाई गई दाल और चावल की रा​खी: संवाद - फोटो : संवाद
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मिंजर मेले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने बनाईं खास राखियां
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शुभ मानी जाती है यह राखी, मंदिर में चढ़ाने के लिए भी खरीदी जा रही
रिंपी ठाकुर
चंबा। अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले में इस बार एक अनूठा और पारंपरिक दृश्य देखने को मिल रहा है। वर्षों बाद चंबा की बहनों ने एक बार फिर पुराने रीति-रिवाजों को जीवंत किया है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से तैयार की गई दाल-चावल की राखी मेले में आकर्षण का केंद्र बन गई है। मूंग दाल, मलका दाल, चावल और रंगीन धागों से बनी यह राखी न सिर्फ देखने में सुंदर है, बल्कि इसकी गूंज परंपरा की गहराइयों से जुड़ी है।
महिलाओं शकुंतला, सुमन कुमारी का कहना है कि यह परंपरा उनके बुजुर्गों के समय से चली आ रही है, जब साज-सज्जा वाली राखियों के बजाय शुभ मानी जाने वाली घरेलू वस्तुओं से राखी तैयार की जाती थी। 40 रुपये की कीमत में बिक रही यह राखी मंदिर में चढ़ाने के लिए भी खास तौर पर खरीदी जा रही है। मेले में आने वाले लोग इसे पवित्रता और आत्मीयता का प्रतीक मानते हुए स्टॉलों से ले रहे हैं।
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इनसेट
महिला समूह की मेहनत लाई रंग
महिलाओं ने बताया कि राखी बनाने में उन्हें दो से तीन दिन का समय लगा। यह पहल न केवल परंपरा को फिर से जीवंत कर रही है, बल्कि महिलाओं के लिए आय का साधन भी बन रही है। कभी गांव में बहनें राखी की जगह दाल और चावल से बनी रक्षा-सूत्र बांधती थीं। यह न सिर्फ स्नेह का प्रतीक होता था, बल्कि शुभ और पवित्र भी माना जाता था। मिंजर मेले में लगे स्टॉलों पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मूंग दाल, चावल और रेशमी धागों से राखियां तैयार कर बाजार में परंपरा की खुशबू फैला दी है। यह राखी सिर्फ भाई की कलाई के लिए नहीं, बल्कि इसे देवी-देवताओं को चढ़ाने के लिए भी खरीद रहे हैं। बता दें कि आठ अगस्त को रक्षा बंधन का त्योहार आ रहा है। इसके चलते महिलाओं ने खुद राखियां बनाकर स्टॉल पर सजा दी हैं।
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