संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में अब व्यावसायिक स्तर पर ड्रैगन फ्रूट की खेती की तैयारी चल रही है। यह खेती मनरेगा के तहत होगी। जिले के दो किसानों की ओर से ड्रैगन फ्रूट की सफल खेती के बाद अब अन्य छोटे और मध्यम किसानों को भी इस खेती से जोड़ा जा रहा है।
जिला के अंब और बंगाणा उपमंडल में मनरेगा के तहत 80 किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के साथ जोड़ने का काम चल रहा है। फिलहाल बंगाणा उपमंडल के 24 किसानों को 24 लाख रुपये मनरेगा के तहत स्वीकृत किए गए हैं। इसके तहत किसान ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन के लिए खेत को तैयार करने के अलावा प्लांटेशन मटीरियल, ट्रेलिस सिस्टम (खंभेनुमा स्ट्रक्चर) बनाया जा सकता है। करीब 16 हेक्टेयर भूमि पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर इसे व्यावसायिक स्तर पर ले जाया जाएगा। इससे किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी। इसी के साथ मार्केट में भी इस फल की स्थानीय स्तर पर उपलब्धता रहेगी।
उधर, इस संबंध में उपायुक्त राघव शर्मा ने बताया कि जिले में दो किसान मुश्ताक और रेवा ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। इनके सफल परिणाम देखने को मिले हैं। जिले में ड्रैगन फ्रूट को मनरेगा के साथ जोड़ा गया है। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेेंगे। बता दें कि भारत में ड्रैगन फ्रूट की कुल मांग का मात्र 30 फीसदी उत्पादन होता है, जबकि अन्य 70 फीसदी का आयात किया जाता है।
बाजार में ड्रैगन फ्रूट की भारी मांग
खनिज पोटाश, कैल्शियम, एंटी ऑक्सीडेंट तथा एंटीएजिंग तत्वों से भरपूर ड्रैगन फ्रूट की बाजार में भारी मांग है। बाजार में इसकी कीमत 100 रुपये प्रति फल तक है। दिल और कैंसर के मरीजों के लिए यह फल लाभदायक है। खाने में यह फल स्ट्रॉबेरी और लीची की तरह मीठा स्वाद देता है। यह फल जितना स्वादिष्ट है, उतना ही स्वास्थ्य वर्धक भी। इंसान के शरीर में ड्रैगन फ्रूट एक दवा का काम करता है।
फल तैयार होने में लगता है 40 दिन
सितंबर से अक्तूबर में फूल से फल तैयार होने में 40 दिन का समय लगता है। ठंड के मौसम में दो महीने का समय भी लग जाता है। ड्रैगन फ्रूट के पौधे का औसतन जीवन 25-30 वर्ष होता है। ऐसे में किसान को एक ही बार निवेश करना होता है।