हरोली में पहले चरण में तीन तालाबों पर खर्च होंगे साढ़े तीन करोड़ रुपये
11.75 करोड़ से हरोली के तालाबों का संरक्षण कर वर्षा जल को करेंगे संग्रहित
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। औद्योगिक विकास और बढ़ते भूजल दोहन के बीच हरोली अब भविष्य की जल सुरक्षा का नया रास्ता तैयार करने में जुट गया है। बल्क ड्रग पार्क में पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगाए गए 15 ट्यूबवेलों के कारण आने वाले समय में भूजल स्तर पर दबाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने पारंपरिक तालाबों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से पुनर्जीवित करने की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 11.75 करोड़ रुपये से हरोली के तालाबों का स्वरूप बदला जाएगा।
परियोजना के पहले चरण में पुबोवाल, दुलैहड़, गोंदपुर जयचंद समेत विभिन्न तालाबों को वैज्ञानिक तरीके से संवारा गया है । पुबोवाल तालाब पर करीब दो करोड़ और दुलैहड़ तालाब पर 1.26 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इनमें कई हिस्सों में 90 से 100 प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है।
वर्तमान में हराेली क्षेत्र केंद्रीय भू जल बोर्ड के अनुसार 62 प्रतिशत दोहन के साथ सुरक्षित श्रेणी में है, लेकिन बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन और बल्क ड्रग पार्क की जरूरतों को देखते हुए यह परियोजना भविष्य की जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और पूरे हिमाचल के लिए एक आदर्श जल संरक्षण मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है।
यह होगा लाभ
विभाग की फरवरी 2025 की फिजिविलिटी रिपोर्ट के मुताबिक परियोजना पूरी होने पर हर साल करीब 58 लाख घन मीटर अतिरिक्त भूजल पुनर्भरण क्षमता विकसित होगी, जबकि 0.90 एमएलडी अतिरिक्त जल उपलब्ध हो सकेगा। पुबोवाल तालाब अकेले 32 लाख घन मीटर और छह छोटे तालाब संयुक्त रूप से 26 लाख घन मीटर पुनर्भरण क्षमता देंगे।
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भू संरक्षण के साथ तालाबों का कायाकल्प:
इस परियोजना के तहत वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, जल गुणवत्ता में सुधार, टिकाऊ जल प्रबंधन और तालाबों के सौंदर्यीकरण को एक साथ मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत तालाबों से गाद हटाने, तटबंध मजबूत करने और भूजल पुनर्भरण की संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही जलग्रहण क्षेत्रों में सुधार, निर्मित आर्द्रभूमि, इन-सीटू ट्रीटमेंट सिस्टम, एरेशन सिस्टम और कैस्केड संरचनाओं जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर पानी की गुणवत्ता और तालाबों की प्राकृतिक क्षमता बढ़ाई जा रही है।
कोट:
वर्तमान में 6 करोड़ की तकनीकी मंजूरी मिली है, जिसमें से करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये से तीन तालाबों काम हुआ है। इसके बाद हरोली उपमंडल के अन्य तालाबों का चयन कर उनका भी कायाकल्प किया जाएगा। -नरेश धीमान, अधीक्षण अभियंता, जल शक्ति विभाग ऊना