ऊना। एक समय था जब गर्मियों और बरसात के मौसम बीच गांवों के बच्चे पेड़ों पर चढ़कर मुफ्त में जामुन तोड़ इसके स्वाद का आनंद लेते थे लेकिन इन दिनों जामुन का स्वाद चखने के लिए लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। बदलते वक्त के साथ अब तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। हर जगह आसानी से मिलने वाला यह देसी फल इन दिनों आम आदमी की पहुंच के बाहर होता जा रहा है। कभी मुफ्त में मिलने वाला जामुन इन दिनों बाजार में 170 से 200 रुपये किलो तक बिक रहा है। स्थानीय स्तर पर इसकी उपलब्धता घटने से बाजार अब पड़ोसी राज्यों से आने वाली सप्लाई पर निर्भर हो गया है।
फल कारोबारियों के मुताबिक इस बार स्थानीय क्षेत्रों में जामुन की पैदावार काफी कम हुई है। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव, लंबे समय तक पड़ी तेज गर्मी और बेमौसमी बारिश के कारण जामुन के पेड़ों पर फलन प्रभावित हुआ है। व्यापारियों का कहना है कि बाहरी राज्यों से आने वाली खेप पर परिवहन खर्च अलग से जुड़ जाता है। यही कारण है कि इस बार जामुन के दाम बढ़े हैं। बाजार में आवक सीमित है जबकि गर्मी के मौसम में इसकी मांग लगातार बनी हुई है।
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जामुन की फसल इस बार कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बेमौसमी बारिश सबसे बड़ा कारण हो सकता है। क्योंकि फ्लावरिंग के समय बारिश होने से फूल झड़ जाते हैं और जो बच जाते हैं उनमें बीमारियां लग जाती हैं। जिसके कारण इस बार जामुन की पैदावार में कमी दिख रही है।
-डाॅ. केके भारद्वाज, उपनिदेशक, बागवानी विभाग ऊना