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गेहूं की फसल में मुश्किल से पूरी हो रही लागत, किसान परेशान

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ऊना क्षेत्र में गेहूं की कटाई करते किसान। संवाद - फोटो : Una
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ऊना। जिले में गेहूं की कटाई जोरों पर है। किसानों के लिए फायदे का सौदा माने जाने वाली गेहूं इस बार मुश्किल से लागत मूल्य पूरा कर पा रही है। वजह है कि इस साल गेहूं का बीज, खाद, कीटनाशक समेत फसल की देखभाल से जुड़ी तमाम वस्तुएं महंगी हो चुकी हैं। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) केवल 35 रुपये बढ़ाकर 2015 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। इस बार एक क्विंटल गेहूं उत्पादन में करीब दो हजार रुपये खर्च हुए हैं।
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इस बार एक कनाल खेत में औसतन एक क्विंटल गेहूं की पैदावार हो रही है। वहीं एक क्विंटल गेहूं पर खर्च करीब दो हजार रुपये तक पहुंच रहा है। पिछले साल यह लागत 15 सौ रुपये तक थी और पैदावार भी अच्छी हुई थी। गेहूं का बीज और खाद बीते साल के मुकाबले इस बार अधिक महंगा मिला है। खेतों में काम करने वालों की मजदूरी भी इस बार बढ़ी है। इस बार प्रति कनाल 100 से 150 रुपये दिहाड़ी बढ़ी है। गेहूं और तूड़ी को घर पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर और अन्य मालवाहक वाहनों का किराया भी डीजल दाम बढ़ने से बढ़ा है। इसी तरह खेतों में बिजाई के लिए ट्रैक्टर का किराया भी 50 रुपये प्रति कनाल अधिक रहा।
गेहूं की पैदावार में भी 15 से 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। किसान इसकी वजह मार्च में तीखी धूप और बारिश न होने को मान रहे हैं। जिला कृषि उत्पाद बाजार समिति के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि गेहूं की एमएसपी इस बार 35 रुपये तक बढ़ी है। मंडियों में किसानों को सुविधाओं का ख्याल रखा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में और इजाफा होगा।
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