ऊना। जिले में डेंगू व स्क्रब टायफस के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की चिंता बढ़नी शुरू हो गई है। डेंगू के बढ़ते मामलों से लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, कोरोना का कहर भी जिले में जारी है। स्कूली बच्चों के साथ अन्य कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। जिसने अभिभावकों की चिंताएं बढ़ा दी है।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लोगों को स्क्रब टायफस व डेंगू के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। ताकि डेंगू से बचा जा सके।
जिला में डेंगू के करीब 35 मामले व स्क्रब टायफस के 40 मामले अभी तक सामने आ चुके हैं। जबकि रोजाना नए मामले सामने आ रहे हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक बार फिर एडवाइजरी जारी की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार डेंगू के लक्षण आने पर इनकी अनदेखी खतरनाक हो सकती है। इसीलिए जैसे ही डेंगू के लक्षण आएं, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सीय सलाह अवश्य लें।
उधर सीएमओ डॉ रमन शर्मा ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्क्रब टायफस का इलाज उपलब्ध है। डेंगू को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बताया कि लोग अपने शरीर को पूरी तरह से ढक कर रखें, ताकि डेंगू और स्क्रब टायफस जैसी बीमारियों को बढ़ने से रोका जा सके।
यह है लक्षण
डेंगू एक मच्छर के काटने से होता है। मच्छर के काटने से डेंगू वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश कर जाता है तथा रोगी को तेज बुखार, सिर दर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द आदि होता है। इसके अलावा कई बार नाक से, आमाश्य से रक्त स्राव होना, बेहोश हो जाना, शरीर में प्लेटलेस की कमी भी होती है।
ऐसे करें रोकथाम
डेंगू का मच्छर टूटे बर्तनों, टायरों, कूलरों, एसी व खड़े पानी की टंकी में पनपते हैं। यह मच्छर दिन को काटता है। सप्ताह में एक या दो बार कूलर, एसी तथा टंकी के पानी को जरूर बदलें। कूलरों में लंबे समय तक पानी न बदलने के कारण डेंगू का मच्छर पनपने की अधिक संभावनाएं रहती है। साथ ही टूटे बर्तनों, पुराने टायरों, टूटे घड़े आदि को घर में न रखें ताकि उनमें पानी न ठहरें। साथ ही समय-समय पर घरों में मच्छर मारने के लिए कीटनाशकों का भी छिड़काव करें।