ऊना। जिले में लगातार हो रही बारिश ने खरीफ फसलों के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है। खेतों में नमी बढ़ने से जहां मक्की की फसल तेजी से बढ़ रही है, वहीं खरपतवार भी उसी रफ्तार से फैल रहा है। कई स्थानों पर खेतों में घास मक्की के पौधों के बराबर ऊंचाई तक पहुंच चुकी है जिससे फसल का विकास प्रभावित होने लगा है। दूसरी ओर लगातार बारिश के कारण किसानों को न तो खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव करने का मौका मिल रहा है और न ही समय पर खाद डाल पा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिला के पांचों उपमंडलों में मक्की की फसल तैयार हो रही है। वर्तमान में फसल के लिए खाद और कीटनाशकों की सबसे अधिक आवश्यकता है लेकिन खेतों में लगातार नमी और बारिश के चलते किसान खेतों में काम नहीं कर पा रहे। जिले में इस बार करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मक्की की खेती की गई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में किसान टमाटर, मिर्च, भिंडी, लौकी, तोरी सहित अन्य हरी सब्जियों की खेती भी कर रहे हैं। लगातार बारिश का असर इन फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। इसके बाद खेतों में खाद डालने का कार्य शुरू किया जाएगा ताकि फसल को पर्याप्त पोषण मिल सके। उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि बारिश के बाद कीटनाशकों, खरपतवार हटाने की दवाई और खाद छिड़काव का उपयुक्त समय है। हालांकि उसके बाद अच्छी धूप भी फसलों के लिए जरूरी हो जाती है। अगर छिड़काव के कुछ देर बाद बारिश हो जाए तो छिड़काव का असर पूरी तक नहीं हो पाएगा।
किसान प्रेम चंद ने बताया कि लगातार बारिश के कारण खेतों में घास बहुत तेजी से बढ़ रही है। कई जगह घास मक्की के पौधों के बराबर पहुंच गई है। ऐसे में यदि समय पर खरपतवार नहीं हटाई गई तो फसल कमजोर हो जाएगी। बारिश रुकने का इंतजार किया जा रहा है ताकि पहले दवा का छिड़काव और उसके बाद खाद डाली जा सके।
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किसान रोहित कुमार ने कहा कि इस समय मक्की की फसल को खाद की जरूरत है लेकिन लगातार बारिश के कारण खेतों में जाना मुश्किल हो गया है। बिना खरपतवार हटाए खाद डालने से उसका पूरा लाभ नहीं मिलेगा। यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम ऐसा ही रहा तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है। वहीं सब्जियों की फसलों में भी रोग लगने की आशंका बढ़ गई है।