ऊना। शहर में लावारिस कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। मुख्य बाजारों, रिहायशी क्षेत्रों, बस स्टैंड, पार्कों और स्कूलों के आसपास बड़ी संख्या में घूम रहे कुत्तों के कारण लोगों में दहशत का माहौल है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सुबह-शाम टहलने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शहर के ऊना बाल स्कूल और कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के आसपास भी लावारिस कुत्तों की भरमार देखी जा रही है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। कई बार कुत्ते झुंड बनाकर सड़कों और गलियों में घूमते रहते हैं, जिससे बच्चों में भय का माहौल रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम की ओर से समय-समय पर कुत्तों की नसबंदी और अन्य प्रबंधन संबंधी अभियान चलाए जाने के दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इन प्रयासों का अपेक्षित असर दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर कुत्ते राहगीरों का पीछा करते हैं और वाहन चालकों के सामने अचानक आ जाने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है जब कुत्तों के झुंड सड़कों पर सक्रिय रहते हैं। हाल के वर्षों में कुत्तों के काटने के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है जिससे लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। इसे लेकर स्थानीय लोगों ने अपने विचार साझा किए।
इस समस्या को लेकर फोरम की बैठकों में कई बार चर्चा हो चुकी है। प्रशासन व नगर निगम से गुहार भी लगाई गई है। अब यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है।
- जीआर वर्मा, अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक फोरम ऊना
लावारिस कुत्तों को लेकर नगर निगम को डॉग शेल्टर होम बनाना चाहिए। इसके अलावा समय समय टीकाकरण व अन्य व्यवस्थाओं को भी जांच होनी चाहिए।
- नवदीप कश्यप, पूर्व पार्षद
लावारिस कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत कार्य किया जा रहा है। बीते कुछ दिनों में डॉग बाइट के मामले भी सामने आए हैं। इस मामले पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।
-पृथी पाल सिंह, आयुक्त नगर निगम ऊना