फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Una News: सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रती महिलाओं ने मांगी संतान की खुशहाली

विज्ञापन
सतलुज घाटविभोर के पंजगाटडा सतलुज घाट पर उमड़ी भक्तों की भीड़।संवाद - फोटो : संवाद
विज्ञापन
छठ महापर्व पर दीपों से जगमगाया पंजगाटडा सतलुज घाट
विज्ञापन


विभोर के पंजगाटडा सतलुज घाट पर उमड़ी भक्तों की भीड़
संवाद न्यूज़ एजेंसी

मैहतपुर (ऊना)। पिछले तीन दिनों से चल रहे लोक आस्था के महापर्व छठ का मंगलवार सुबह सूर्य देव (भगवान भास्कर) को अर्घ्य अर्पित करने के साथ विधिवत समापन हो गया। छठ महापर्व पर पंजगाटडा सतलुज घाट दीपों से जगमगा उठा। ऊना जिले के सरहदी इलाकों में रह रहे बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी परिवारों ने बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस पर्व को मनाया। मंगलवार तड़के करीब चार बजे से ही व्रतधारी महिलाएं और उनके परिजन सतलुज घाट पर एकत्र होना शुरू हो गए थे। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी, हाथों में धूप, दीप, नैवेद्य, फल-फूल और प्रसाद से भरी टोकरियां लेकर घाट पर पहुंचीं और छठी मैया की पूजा-अर्चना की।
विज्ञापन

घाट के ठंडे जल में करीब एक घंटे तक खड़े रहकर महिलाओं ने भगवान भास्कर की आराधना की। बिहार की कंचन ने बताया कि छठ व्रत में तीन दिन तक पूर्ण उपवास रखा जाता है। वह यहां पिछले 12 वर्षों से रह रही हैं और यह कठिन व्रत कर रही हैं। यह व्रत संतान की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा -छठी मैया की कृपा से सब संभव हो जाता है। सतलुज घाट पर तड़के महिलाओं के साथ-साथ कुछ पुरुष भी अपनी संतान की मंगलकामना के लिए यह व्रत करते दिखाई दिए। तीन दिन तक व्रती महिलाएं प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं और सांध्यकाल में ढलते सूर्य की आरती करती हैं। अंतिम दिन उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा का समापन किया जाता है। जो प्रवासी परिवार कार्यव्यस्तता के कारण अपने गृह राज्य नहीं जा पाए, उन्होंने यहीं ऊना में रहकर पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ छठी मैया का पूजन किया। छपरा (बिहार) की सुधा और पूनम ने बताया कि वे पिछले तीन-चार वर्षों से यह व्रत ऊना में ही कर रही हैं। उन्होंने कहा -यह हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे संजोकर रखना हम सबका दायित्व है। दिल तो करता है घर जाकर पूजा करें, पर जब संभव नहीं होता तो यहीं छठी मैया का आशीर्वाद ले लेते हैं। मंगलवार सुबह 6 बजकर 58 मिनट पर जैसे ही सूर्य देव के दर्शन हुए, व्रती महिलाओं ने अर्घ्य अर्पित किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर सभी प्रवासी परिवार हर्षोल्लास के साथ अपने घरों को लौट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें