ऊना। हिमाचल पथ परिवहन निगम कर्मचारियों के वर्क टू रूल आंदोलन के चलते निगम का बेड़ा थमने की कगार पर पहुंच गया है। पिछले चार दिन से चले इस आंदोलन से निगम प्रबंधन को जिला में लाखों का घाटा पड़ने से अभी तक रूटों में फेरबदल कर ही बचाया जा रहा है। लेकिन, आने वाले दिनों में यह समस्या भयंकर रूप धारण कर सकती है। कर्मचारियों के 8 घंटे की ड्यूटी देने के ऐलान से बस रूटों को निश्चित स्थानों तक पहुंचाने को असफरशाही भी असमर्थ दिख रही है। जिसके चलते अन्य जिलों के साथ-साथ ऊना डिपो की हालत भी धीरे-धीरे पतली होती दिखाई दे रही है। आंदोलन के ऐलान के दिन से ही निगम अधिकारियों की ओर कम आय देने वाले रूटों पर कैंची चला दी गई है। स्थानीय रूटों में भी अभी तक इनकम जनरेटिंग बस रूटों पर ही फोकस किया जा रहा है। रोजाना एक दर्जन से अधिक लोकल एवं लंबे रूट प्रभावित हो रहे हैं। जिससे ऊना डिपो की रोजाना आमदनी में कुछ कमी अवश्य हुई है। हालांकि, निगम कर्मियाें का दावा है कि अभी तक ऊना डिपो में घाटे जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। कम आय देने वाले बस रूटों के बंद होनेे से सरकारी बसों में सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिससे लोगों को अपने गंतव्यों तक पहुंचने के लिए टैक्सियों का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
उधर, एचआरटीसी के आरएम अनूप राणा ने बताया कि आंदोलन से निगम को किसी प्रकार का घाटा नहीं पड़ा है, जो लोकल रूट प्रभावित हुए हैं, निगम ने उन्हें बंद कर दिया है। केवल इनकम जनरेटिंग रूटों पर बसें दौड़ाई जा रही हैं।