बाड़बंदी से भागे बंदर-सुअर, खेतों में लहलाई फसल
लोअर देहलां के पवन के लिए खेत संरक्षण योजना बनी वरदान
एक हेक्टेयर में सोलरयुक्त बाड़बंदी से की फसल सुरक्षित, बढ़ी उपज
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। आए दिन बंदरों व अन्य जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान के चलते मजबूरी में खेती छोड़ने के लिए विवश प्रदेश के किसानों के लिए राहत की खबर है। प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना ने धरातल पर अपना परिणाम दिखाना शुरू कर दिया है। बाड़बंदी योजना से लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही खेती-बाड़ी अब फायदे का सौदा साबित हो रही है। ऊना के सांसद आदर्श गांव लोअर देहलां निवासी 62 वर्षीय पवन कुमार ऐरी के लिए मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना वरदान बनी। बाड़बंदी से जंगली जानवरों के उत्पात से फसलों को होने वाला नुकसान कम हुआ है, वहीं फसल के उत्पादन में भी वृद्धि हुई। पवन कुमार ऐरी ने बताया कि उन्होंने लगभग एक हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में सोलरयुक्त बाड़बंदी कर रखी है। इससे जंगली जानवरों जैसे बंदर, नील गाय, सांभर, जंगली सुअर आदि से उनकी फसल सुरक्षित हुई। उनका कहना है कि सोलरयुक्त बाड़बंदी का असर आसपास के खेतों पर भी पड़ा है। उन्होंने बताया कि पहले उनके एक हेक्टेयर रकबे में 22 से 25 क्विंटल गेहूं की पैदावार होती थी जो अब बढ़कर 35 से 40 क्विंटल तक पहुंच गई है।
पवन कुमार का कहना है कि सोलरयुक्त बाड़बंदी के बाद खेतों की रखवाली के लिए उन्हें दिन-रात पहरा नहीं देना पड़ रहा।
ऐसे काम करती है बाड़
सोलरयुक्त बाड़ को छूने पर जहां 12 वोल्ट करंट का झटका लगता है तो वहीं इसका रखरखाव भी ज्यादा मुश्किल नहीं है। पवन का कहना है कि यदि सरकार बाड़बंदी करते समय निचले हिस्से को पक्का करने या पोलीशीट लगाने का भी प्रावधान कर दे तो घास और झाड़ियां उगने से अक्सर बाड़ में करंट अवरुद्ध होने से भी छुटकारा मिलेगा।
उपनिदेशक कृषि विभाग ऊना यशपाल चौधरी का कहना है कि मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत सरकार सोलरयुक्त बाड़बंदी के लिए 80 प्रतिशत तक का अनुदान उपलब्ध करवा रही है। ऊना में 2017-18 के दौरान 42 किसानों को लाभान्वित कर 1.14 करोड़ की राशि खर्च की है। 18 हजार 400 मीटर लंबी परिधि की नौ कतारों वाली तारें लगाई हैं। एक बैट्री से 1500 मीटर सोलरयुक्त बाड़बंदी की जा सकती है।