ऊना। जिले में इस बार गेहूं की फसल पर मौसम की मार भारी पड़ गई है। अंधड़, बारिश और ओलावृष्टि के चलते करीब 20 फीसदी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। हालात ये हैं कि कई स्थानों पर किसानों को मजबूरी में गीली फसल की ही थ्रेसिंग करवानी पड़ी। वहीं कई किसान ऐसे भी हैं, जो अभी भी फसल की थ्रेसिंग के लिए मौसम के साफ रहने का इंतजार कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ऊना जिला में 35000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल तैयार की गई। फसल के शुरुआती दौर में करीब ढाई माह तक बारिश नहीं हुई। इससे गैर सिंचित इलाकों में फसल की बढ़ोतरी प्रभावित हुई। उसके बाद बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हुआ और सिंचित इलाकों में अच्छी खासी तैयार फसल गिर गई। फसल कटाई तक मौसम का यही दौर जारी रहा। नतीजा यह निकला कि 20 फीसदी तक फसल बर्बाद हो गई। इससे पैदावार में भी गिरावट आई।
किसानों में राजेश कुमार, अमित, अनूप शर्मा, राजवीर सिंह, ओम प्रकाश सहित अन्य का कहना है कि फसल पकने के समय लगातार खराब मौसम ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी फसल गिर गई, जिससे दाने काले पड़ने लगे और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई। इससे मंडियों में उचित दाम मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है। किसानों ने बताया कि इस बार सिर्फ गेहूं ही नहीं बल्कि आलू और मक्का जैसी अन्य फसलें भी घाटे का सौदा साबित हो रही हैं। लागत बढ़ने और उत्पादन घटने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। किसानों का कहना है कि खेती अब पहले जितनी लाभकारी नहीं रही। उधर, उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. प्रेम ठाकुर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का सही आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
प्रशासन से मुआवजे की मांग
घालूवाल निवासी किसान बलवीर चंद ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के चलते हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को जल्द राहत प्रदान करनी चाहिए ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।
पंडोगा निवासी किसान विनोद कुमार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अब फसलों के चक्र में बदलाव करना जरूरी हो गया है। पारंपरिक खेती के बजाय ऐसी फसलों की ओर रुख करना होगा, जो मौसम के उतार-चढ़ाव को झेल सकें और बेहतर आय दे सकें।