ऊना। धर्मगुुरु ब्रह्मऋषि कुमार स्वामी ने कहा कि भारत की पहचान वैदिक संस्कृति से है। कई देशों ने भारतीय संस्कृति में निहित ज्ञान का प्रयोग शुरू किया है। इससे उनकी ऊर्जा बढ़ रही है। भारत के ऋषि-मुनियों ने वेदों के अलावा बीज मंत्र जैसी शक्ति विश्व को दी। इसका सही तरीके से प्रयोग मानवजाति के कष्ट दूर करने की सामर्थ्य रखता है।
जिला ऊना के साथ लगते पंजाब के कलसेहड़ा में आयोजित दुख निवारण समागम में उन्होंने कहा कि बीज मंत्रों में ब्रह्मांडीय शक्ति निहित है। इससे पहले जालंधर हवाई अड्डे पर अनुयायियों ने उनका भव्य स्वागत किया। शनिवार देर रात शुरू हुए दिव्य बीज मंत्र और प्रवचन कार्यक्रम में रविवार को भी हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। समागम में पहली बार श्री दुर्गा सप्तशती के दुर्लभ और अद्भुत रहस्य बताए गए।
कुमार स्वामी ने कहा कि यह ऐसे रहस्य हैं, जिन्हें जान लेने के बाद दुखों का तत्क्षण नाश होता है। सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है। शनिवार को समागम की शुरुआत रात 9 बजे से हुई जबकि रविवार को दोपहर 4 बजे के बाद कुमार स्वामी ने श्रद्धालुओं को बीज मंत्रों के रहस्य से बताया। उन्होंने कहा कि उनके माध्यम से अगर किसी का भला हो रहा है तो वह मां जगदंबा और भगवान शिव की कृपा है। समागम में हिमाचल और पंजाब के लोगों ने शिरकत की।