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दो भीषण अग्निकांडों से दहला शिमला

Wed, 29 Jan 2014 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मंगलवार हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के लिए अमंगल भरा रहा। तड़के करीब 3 बजे लगी आग में एजी ऑफिस के 110 साल पुराने धरोहर भवन गॉर्टन कैसल की ऊपरी दो मंजिलें राख हो गईं। इसमें सरकारी कर्मचारियों का पेंशन और जीपीएफ संबंधी रिकार्ड भी नष्ट हो गया। हालांकि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
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अभी यह आग बुझी ही थी कि दोपहर बाद भीड़भाड़ वाले लोअर बाजार में आग लग गई। इसमें सात दुकानें जल गईं। दोनों जगह आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। अग्निकांडों से करोड़ों का नुकसान हुआ है।

मंगलवार तड़के शहर की ऐतिहासिक बिल्डिंग गार्टन कैसल में आग की लपटें दिखनी शुरू हुईं। करीब साढे़ तीन बजे सूचना मिलने पर सबसे पहले अग्निशमन का बचाव दल मौके पर पहुंचा। इसके बाद आरट्रैक से सेना के बचाव दल ने भी मौके पर पहुंच कर बचा हुआ सामान सुरक्षित निकाला।
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इन जवानों ने एजी के मुख्य सर्वर और बैकअप डाटा को भी बचा लिया। दोपहर बाद 1.00 बजे तक आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। नुकसान का आकलन अभी नहीं हो पाया है। ऊपर की दो मंजिलें जल गई हैं और नीचे की दो मंजिलों में आग बुझाने के लिए फेंका गया पानी भर गया है।

जिस समय गार्टन कैसल में आग लगी, उस समय भवन के अंदर चार कर्मचारी चौकीदार के रूप में थे, लेकिन इसके बावजूद अग्निशमन को सूचना किसी व्यक्ति ने पहले बस अड्डे से और फिर होटल लैंडमार्क से दी गई।

अग्निशमन कर्मियों को भी मुख्य द्वार का ताला तोड़कर अंदर जाना पड़ा। इसके बाद कुछ हाइड्रेंटों में पानी न मिलने की बात भी सामने आई। सुबह करीब 11 बजे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, विधानसभा अध्यक्ष बुटेल और डीजी होमगार्ड आईडी भंडारी ने मौके का दौरा किया।

अभी यहां बचाव कार्य चल ही रहा था कि दोपहर बाद करीब डेढ़ बजे लोअर बाजार में आग लग गई। यहां तंग सड़क से घटनास्थल तक पहुंचने में फायर टेंडर को मुश्किल हुई और 3 बजे आग बुझाई जा सकी। घटना में सात दुकानों में से चार पूरी तरह जल गईं, जबकि अन्य को नुकसान हुआ है। एसडीएम शहरी जीसी नेगी ने प्रभावित 14 परिवारों को 93 हजार की फौरी राहत दी।



थ्री इडियट्स में दिखा था गॉर्टन कैसल
आमिर खान की चर्चित फिल्म थ्री इडियट्स में गॉर्टन कैसल चांचड़ भवन के रूप में दिखा था। फिल्म में स्कैंडल प्वांइट पर चने बेचने वाले ने जिस इमारत की ओर इशारा कर चांचड़ भवन दिखाया था, यह वही भवन है। सिल्वर स्क्रीन पर आने से पहले इस भवन का इतिहास भी कमाल का रहा है। ब्रिटिश काल के समय 1904 में यह भवन बना। इसे भारत सरकार का सिविल सचिवालय बनाया गया। इसके बाद 1947 में इसे एजी को सौंपा गया।

तब चार मंजिला इस भवन में करीब 125 कमरे थे। आजादी के बाद इसी भवन में एजी पंजाब का कार्यालय चला। बाद में इसे हिमाचल को दिया गया। गौथिक शैली के इस भवन की बालकनी में राजस्थानी शैली की नक्काशी की गई है। इसकी एक मंजिला में रोजवुड इस्तेमाल की गई थी, जिसे अंडमान से लाया गया था। वर्तमान में इसमें एजी ऑफिस चल रहा था।
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