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जीएसटी का खेल: हिमाचल में ठेकेदारों से रकम काटी पर सरकारी खाते में नहीं पहुंची, जानें पूरा मामला

Tue, 29 Sep 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, शिमला।

सार

 ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में विभिन्न कार्यों और सामग्री खरीद के भुगतान के दौरान जीएसटी की वसूली के मामले में गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं।  ठेकेदारों के बिलों से जीएसटी और अन्य वैधानिक मदों की राशि काटी गई, लेकिन उसे संबंधित सरकारी विभागों में जमा नहीं करवाया गया। 
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जीएसटी का खेल। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में विभिन्न कार्यों और सामग्री खरीद के भुगतान के दौरान जीएसटी की वसूली के मामले में गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आ रहे हैं। ठेकेदारों के बिलों से जीएसटी और अन्य वैधानिक मदों की राशि काटी गई, लेकिन उसे संबंधित सरकारी विभागों में जमा नहीं करवाया गया। वहीं, कुछ मामलों में जहां जीएसटी या टीडीएस काटा जाना था, वहां कटौती किए बिना ही ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को पूरा भुगतान कर दिया गया। नगर पंचायत निरमंड और ग्राम पंचायत गोपालपुर के मामले इसकी अलग-अलग तस्वीर सामने रखते हैं। निरमंड में ठेकेदारों से राशि काटी गई, लेकिन संबंधित विभागों में जमा नहीं करवाई गई, जबकि गोपालपुर में निर्धारित जीएसटी-टीडीएस काटे बिना भुगतान कर दिया गया। ऐसे और भी कई उदाहरण हैं।

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निरमंड में 7.56 लाख काटे, जमा नहीं किए
नगर पंचायत निरमंड के वर्ष 2023-24 से 2024-25 के लेखों की जांच में ठेकेदारों के बिलों से कुल 7,55,909 रुपये की कटौती की गई। इसमें 2,97,215 रुपये जीएसटी, 1,16,095 रुपये आयकर, 1,48,608 रुपये श्रम प्रभार और 1,93,991 रुपये रॉयल्टी शामिल थी। ऑडिट के अनुसार इतनी बड़ी राशि काटने के बावजूद इसे संबंधित विभागों में जमा नहीं कराया गया। राज्य लेखा परीक्षा विभाग ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और सरकारी आदेशों की अवहेलना माना।

गोपालपुर में कटौती किए बिना 10.58 लाख का भुगतान
ग्राम पंचायत गोपालपुर में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 की अवधि में लेखों की जांच में दूसरी तरह की अनियमितता सामने आई। पंचायत ने रेत, क्रशर, ब्लॉकर, ईंट, सीमेंट, ढुलाई आदि के लिए 10,58,375 रुपये का भुगतान किया। इस पर नियमानुसार 21,167.50 रुपये जीएसटी-टीडीएस काटा जाना था, लेकिन पंचायत ने यह राशि काटे बिना पूरा भुगतान कर दिया। ऑडिट ने इसे अनुचित प्रक्रिया माना और कटौती योग्य राशि वसूलकर संबंधित विभाग में जमा कराने के निर्देश दिए।

 
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क्या बोले मंत्री 
इस संबंध में सरकार के पास शिकायतें भी आई हैं। जीएसटी की वसूली को मैंडेटरी कर दिया गया है और इसके लिए वेंडर्स को जीएसटी नंबर देने को कहा गया है। जहां जीएसटी की वसूली नहीं की जा रही है, वहां देखा जाएगा।- अनिरुद्ध सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री।

जीएसटी को काटना और जमा करना एक अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है। इस संबंध में जिम्मेवार अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले का पता किया जाएगा। - राजेश धर्माणी, नगर नियोजन मंत्री।
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