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जिले में यूरिया खाद का संकट, किसान-बागवान परेशान

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। जिले में यूरिया खाद का संकट बरकरार है। इससे किसानों-बागवानों को अपनी फसलें खराब होने की चिंता सताने लगी है। हिमफैड के पास भी खाद की उचित सप्लाई नहीं आ रही है। जिले में एक महीने के अंदर 297 मीट्रिक टन की आवश्यकता पर सिर्फ 20 मीट्रिक टन खाद की सप्लाई ही मिल रही है।
कई जिला केंद्रों पर खाद का स्टॉक ही खत्म हो गया है। किसान रोजाना खाद डिपुओं के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल रही है। हालांकि हिमफेड के पास नैनो यूरिया है लेकिन इस खाद के बारे में किसानों में जागरूकता नहीं है।
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इस कारण इसकी मांग बहुत कम है। हिमफेड का दावा है कि यह खाद भी यूरिया की तरह फलों और सब्जियों को पोषक तत्व देगी। तरल होने से इस खाद को आसानी से ट्रांसपोर्ट भी किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार मानसून की बारिश के बीच टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी समेत अन्य फसलों के लिए यूरिया खाद अति आवश्यक है लेकिन इस बार अधिकतर किसानों को खाद न मिलने से फसल खराब होने की चिंता सता रही है।
किसानों की मानें तो खाद न मिलने से टमाटर, शिमला मिर्च समेत अन्य फसलें खराब होने लगी हैं। जिले में खुले अधिकतर खाद वितरण केंद्रों में खाद नहीं मिल रही हैं। कुछ केंद्रों में खाद का वितरण किया जा रहा है तो वहां किसानों की मांग के अनुसार नहीं मिल रही है।
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हिमफेड क्षेत्रीय प्रबंधक सोलन हरीश शर्मा ने बताया कि यूरिया खाद की कमी चल रही है। दो दिन में खाद की सप्लाई पहुुंचने की उम्मीद है। किसान नैनो यूरिया का भी प्रयोग कर सकते हैं जो किसानों को सरकारी दाम में दी जा रही है। आधा लीटर की पैकिंग से दो बीघा खेतों को खाद मिल सकती है।
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