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Solan: शूलिनी मेले में महाभारत काल का रोमांच, ठोडो मैदान में पाशी और शाठी दलों के बीच चले तीर, देखें वीडियो

Sat, 27 Jun 2026 12:56 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।

सार

ठोडो मैदान में इस पारंपरिक खेल का भव्य प्रदर्शन किया गया, जहां पाशी और शाठी दलों के वीर योद्धाओं के बीच तीरों का मुकाबला हुआ।
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शूलिनी मेले में ठोडा खेल। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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 महाभारत काल की प्राचीन युद्ध शैली को सोलन, सिरमौर और शिमला के दूरदराज के ग्रामीणों ने आज भी ठोडा नृत्य के रूप में जीवंत रखा है। इसी ऐतिहासिक और पारंपरिक कला का अद्भुत नजारा सोलन के प्रसिद्ध मां शूलिनी मेले के दौरान देखने को मिला। शनिवार दोपहर 12:00 बजे ठोडो मैदान में इस पारंपरिक खेल का भव्य प्रदर्शन किया गया, जहां पाशी और शाठी दलों के वीर योद्धाओं के बीच तीरों का मुकाबला हुआ। इस रोमांचक प्रतियोगिता की विजेता टीम को मेला कमेटी की ओर से विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। इसमें छह टीमें भाग ले रही हैं। पॉइंट के आधार पर इसमें अंक दिए जाएंगे और विजेता टीम को ट्रॉफी व नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।

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 ठोडा नृत्य सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि शौर्य और कौशल का खेल

 ठोडा नृत्य सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि शौर्य और कौशल का खेल है। इसमें विशेष पारंपरिक लिबास पहने खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं। ये खिलाड़ी न केवल विरोधी दल के तीरों के तीखे आक्रमण को झेलते हैं, बल्कि पलक झपकते ही अपने धनुष-बाण से उसका करारा जवाब भी देते हैं। इस खेल के नियम बेहद कड़े हैं, यदि कोई खिलाड़ी थककर मैदान से बाहर हो जाता है, तो उसे पराजित माना जाता है। इसके अलावा, खेल की गरिमा बनाए रखने के लिए पैर पर तीर मारना फाउल माना जाता है।

विशेष पोशाक और चांव की लकड़ी के तीर

ठोडो कमेटी के सदस्यों के अनुसार, यह खेल सतयुग के काल से खेला जा रहा है। प्राचीन समय में यह एक वास्तविक युद्ध शैली थी, जिसने समय के साथ अब एक पारंपरिक खेल का रूप ले लिया है। इस खेल की अपनी कुछ खास विशेषताएं हैं। इसमें खेल में इस्तेमाल होने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से तैयार किए जाते हैं। हिस्सा लेने वाले योद्धा तीर-कमान के साथ-साथ ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े के विशेष जूते पहनकर मैदान में उतरते हैं।
 
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खेल प्रेमी और पर्यटक पहुंचे

इस रोमांचक और ऐतिहासिक खेल को देखने के लिए हर साल ठोडो मैदान में भारी संख्या में खेल प्रेमी और पर्यटक पहुंचे हैं। इस वर्ष इस पारंपरिक उत्सव को और खास बनाने के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।
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महाभारत काल की प्राचीन युद्ध शैली को सोलन, सिरमौर और शिमला के दूरदराज के ग्रामीणों ने आज भी ठोडा नृत्य के रूप में जीवंत रखा है।
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