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यहां हिंदु और मुस्लिम समुदाय केे लोग मिलकर मनाते हैं श्री गुग्गा माड़ी मेला

Sat, 03 Sep 2016 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
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गुग्गामाड़ी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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सरहद पर भारत-पाक के रिश्ते चाहे जितने कुटिल हों लेकिन सोलन के सुबाथू का गुग्गा माड़ी मेला हिंदु मुस्लिम एकता का प्रतीक है। लोगों की आस्था से जुड़ा सुबाथू का श्री गुग्गा माड़ी मेला 8 से 11 सितंबर तक मनाया जाएगा। गुग्गा की छड़ी स्वयं इसका ज्वलंत उदाहरण है। गुग्गा जी की छड़ी में निचली ओर नारियल बंधे हैं तो शीर्ष पर ताजिया विराजमान है।
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गरीब हो या अमीर, भक्त हो या फीकर प्रसन्नचित हो या अधीर गुग्गा मंदिर में सब बराबर हैं। लगभग एक शताब्दी से हर साल गुग्गा पीर की स्मृति में मनाए जाने वाले सुबाथू के मेले का वही महत्व है जो प्रदेश के विभिन्न भागों में मनाए जाने वाले नलवाड़ी, लवी, सिप्पी, मिंजर, शूलिनी और बाडादेव मेलों का है।

हिंदु गुग्गा की छड़ी उठाए, सवैये में गुग्गा गाथा गाते जब सारंगी की धुन पर डमरूओं की थाप देते हैं तो ग्रामीण अंचल में मेले की ओर आता जनसमूह एक अद्वितीय रंग बिरंगी छटा बिखेरता है।
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मेला कमेेटी ने मेले की तैयारियां लगभग पूरी कर दी हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सूची फाइनल हो चुकी है। गुग्गा माड़ी मन्नतों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि सर्प दोष गुग्गा माड़ी के दरबार में आने से सर्पदोष से मुक्ति मिलती है।

सांस्कृतिक संध्या भी होंगी
मेला कमेटी के अनुसार मेले में सांस्कृतिक संध्या के कार्यक्रम तय हो चुके हैं। प्रधान रवि शर्मा ने बताया कि 8 सितंबर को विनोद रांता, अर्जुन गोपाल, राखी गौतम और रमेश ठाकुर तथा 9 को मुकुल ,गीता भारद्वाज, कार्तिक शर्मा और प्रिंस कपिल अपनी प्रस्तुतियां देंगें। 10 को विक्की चौहान, गौरव कौंडल और मुस्कान रंग जमाएंगे। मेले की अंतिम संस्कृत संध्या में मशहूर गायक मास्टर सलीम के भाई पेजी शाह और हिमाचल की जानी मानी आवाज कृतिका तनवर अपनी आवाज जादू का बिखरेंगी।

सुरक्षा के प्रबंध भी कड़े
डीएसपी प्रमोद चौहान ने कहा कि मेले के दौरान हर व्यवस्था का पूरा ख्याल रखा जाएगा। बताया कि मेले में आने वाले बाहरी चेहरों के साथ शरारती तत्वों पर पुलिस कड़ी नजर रखेगी। वहीं मेला कमेटी के प्रधान रवि शर्मा ने कहा कि मेले में आने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ साथ पेयजल व्यवस्था का भी पुख्ता इंतजाम किया है। उन्होंने मेले में आने वाले दुकानदारों से अपील की है कि मेले के दौरान पालीथिन का उपयोग न करें और सीएफएल बल्ब का इस्तेमाल करें।

दावा : अब तक सांप के काटने से कोई मौत नहीं
प्रत्येक स्थान पर गुगामाड़ी की स्थापना का अपना इतिहास है और बाद में कई जन श्रुतियां भी जोड़ दी गईं। मान्यता है कि क्षेत्र को सर्पदंश से किसी की मौत न हो, गुगामाड़ी की स्थापना की गई। ऐसी मान्यता है कि इस क्षेत्र में सर्पदंश अब तक किसी की मौत नहीं हुई। सुबाथू में माड़ी की स्थापना अद्भुत ढंग से हुई थी। मंदिर का स्थान निश्चित करने के लिए ईश्वरीय गुण प्राप्त एक बकरे के गले में लाल डोरी बांधकर खुला छोड़ दिया गया था और यह धारणा रखी कि सारे नगर का भ्रमण करने के बाद यह बकरा जहां घुटने टेकेगा, वहीं गुग्गा माड़ी बनाई जाएगी।
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