संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा रद्द होने से परिणाम में उत्तीर्ण रहे अभ्यर्थियों में मायूसी छा गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार और पुलिस की नाकामी का खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ेगा। वह तो मेहनत से पास हुए थे न कि उन्हें कोई पर्चा मिला था।
युवाओं का कहना है कि कोरोना काल में दो साल से भर्तियां बंद थी। अब जाकर एक भर्ती में उन्होंने जीतोड़ मेहनत कर इसमें बेहतर परिणाम लाए लेकिन परीक्षा के रद्द होने से उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगा है। उन्हें दोबारा होने वाली परीक्षा में फेल होने डर सताने लगा है। अमर उजाला ने जिले के कुछ पास अभ्यर्थियों से दोबारा परीक्षा को लेकर चर्चा की।
टॉप करने के बाद भी नहीं हो सकी भर्ती
पुुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में जिले में टॉप करने वाले दभोटा के हरविंद्र सिंह ने बताया कि परीक्षा रद्द होने से मायूस हैं। यह जरूरी नहीं कि दोबारा लिखित परीक्षा में उनके अंक इतने आ सकें। उन्होंने 72 अंक लेकर जिले में टॉप किया है। बात करते-करते उनके आंसू छलक उठे।
सरकार का सही निर्णय नहीं
खेड़ा नानोवाल के शकील मोहम्मद ने कहा कि उन्हें दोबारा उतनी ही मेहनत करनी पड़ेगी। कुछ लोगों के लालच ने सभी की मेहनत पर पानी फेर दिया है। लाहौल स्पीति, किन्नौर, ऊना और हमीरपुर में युवाओं का चयन भी हो गया था। अब पूरे प्रदेश में युवाओं की दोबारा से परीक्षा करवाना उचित नहीं है।
कांगड़ा में ही रद्द होनी चाहिए परीक्षा
अर्की के साथ लगते पलोग की भारती शर्मा ने बताया कि प्रदेश के कई जिलों में मेरिट सूची जारी कर दी है। केवल कांगड़ा में पेपर लीक होने का मामला सामने आया है तो वहां की ही परीक्षा रद्द करनी चाहिए थी। जो छात्र अपनी मेहनत से लिखित परीक्षा में अच्छें अंक लेने में सफल हुए हैं, जरूरी नहीं कि दोबारा इतने ही अंक ला सकें।
पांच माह की मेहनत पर फिरा पानी
कुनिहार के उच्चा गांव की आकांक्षा ने बताया कि पांच महीने की कड़ी मेहनत और कोचिंग के बाद लिखित परीक्षा पास की थी। हजारों रुपये बरबाद करने का कोई लाभ नहीं मिल सका। अब दोबारा परीक्षा देने में डर लग रहा है। यदि इस बार वह फेल हो गई तो जिम्मेदार कौन होगा।