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सोलन अमर उजाला शिक्षा अभियान

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सोलन में कक्षाओं में पढाई करते विद्यार्थी। संवाद - फोटो : SOLAN
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सोलन। बिना स्कूल आए ही बच्चे तीसरी कक्षा में पहुंच गए हैं। अब इस बार स्कूल खुलने पर अध्यापकों और अभिभावकों को एक नहीं बल्कि तीन-तीन कक्षाओं के बच्चों के स्कूल आने के डर को दूर करना पड़ा।
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ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दो साल से बच्चों ने घर से ही पढ़ाई की। जिन बच्चों ने 2020 में ऑनलाइन पहली कक्षा में दाखिला लिया था, अब वे तीसरी में हैं। ऐसे में जब स्कूल खुले तो वे बच्चे तीसरी कक्षा में हो गए, लेकिन स्कूल का एहसास कैसा होता है, वह उन्हें पता ही नहीं था। उनमें डर पहली कक्षा के बच्चों की तरह ही था। कुछ बच्चे तो अपने अभिभावकों के साथ रोते-रोते स्कूल पहुंचे। पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों के साथ यही समस्या आ रही है। अभी भी कई बच्चे स्कूल न आने की जिद पर अड़े रहते हैं, जिन्हें अभिभावकों को स्कूल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। यदि स्कूल में अभिभावक छोड़ जाते हैं तो यहां पर अध्यापकों के लिए संभालना मुश्किल रहता है। हालांकि अब स्कूल खुले हुए डेढ़ माह बीत चुका है, अब बच्चे थोड़ा स्कूल में दोस्त बनाने और अध्यापकों के प्रयासों से फिर से घुलना-मिलना शुरू हुए हैं। इस बीच अध्यापकों को स्कूल में तीसरी और पहली कक्षा के बच्चों को एक साथ अक्षरों का ज्ञान देना पड़ा।
ब्लैक बोर्ड पर अक्षर ज्ञान की करवाई जा रही प्रतियोगिता
राजकीय प्राथमिक पाठशाला क्लीन की मुख्य अध्यापिका शर्मिला शर्मा ने बताया कि बिना स्कूल आए बच्चे तीसरी में पहुंच गए हैं। ऐसे में उनके मन में थोड़ा डर है। जिसे शिक्षक और अभिभावक मिलकर दूर कर रहे हैं। शुरुआत में कुछ दिक्कतें आई थी। अभिभावकों को बच्चों के साथ कुछ समय स्कूल में बैठना पड़ता था। कई बार घर से भी बुलाना पड़ता था, मगर अब बच्चे आपस में घुल मिल रहे हैं। उनका स्कूल का डर खत्म हो रहा है।
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शुरुआत में बच्चों को स्कूल भेजने में हुई दिक्कत
अभिभावक कुसुम लता ठाकुर ने बताया कि कोविड के बीच दो वर्षों से छोटे बच्चे घर पर ही रहे। इस बीच बच्चों को अपने सहपाठियों के बारे में कोई पता नहीं था। जब स्कूल खुले तो बच्चे पाठशाला न जाने की जिद्द करते रहे। शुरुआत में बच्चों के साथ स्कूल में भी बैठना पड़ा, लेकिन अब बच्चे रोजाना स्कूल बिना आनाकानी के स्कूल जा रहे हैं।
घर द्वार मिली पाठय समाग्री
अभिभावक रजनीश ने कहा घर पर स्मार्ट फोन न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई करवाने में दिक्कत झेलनी पड़ी है। हालांकि बीच-बीच में अध्यापकों ने घर आकर बच्चों को पाठन सामग्री दी है, लेकिन इससे बच्चे बहुत कम समझ पाए। अब स्कूल खुलने के बाद बच्चे स्वयं भी अपना होमवर्क करने लग गए हैं।
कोविड से बचने के लिए रखती हूं साफ-सफाई
छात्रा शिक्षिका ने कहा कि स्कूल में उन्हे कोरोना से बचने के लिए साफ-सफाई रखने को कहा गया है। इसके लिए वे अपने को साफ सुथरा रखती हैं। मास्क लगाने के साथ बार-बार हाथों को साबुन से धोने के साथ सैनिटाइज भी करती हैं। लेकिन पहले स्कूल में ऐसा नहीं करती थी। सिर्फ खाना खाने के लिए हाथ धोती थी।
इनसेट
अब बच्चे घर पर भी देते हैं कोविड सुरक्षा की जानकारी
अभिभावक कुसुम ने कहा कि कोविड के बीच स्कूल खुलने पर वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर घबरा गई थीं, लेकिन कोविड सुरक्षा को लेकर स्कूलों में किए गए इंतजाम को देखने के बाद वह सुरक्षा को लेकर संतुष्ट हो गई। बच्चे कोविड से सुरक्षा कैसे हो सकती है, इसके बारे में बहुत जल्दी ही सीख भी गए और घर पर भी इसकी जानकारी देते हैं।
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