संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन पर निर्भर अधिकतर ग्रामीण और मशरूम उत्पादक भूसे (तूड़ी) की बढ़ती कीमत से परेशान हैं। पशुओं का पेट भरना उनके लिए चुनौती बन गया है। यहां तक कि कई किसानों ने मशरूम उत्पादन छोड़ना भी शुरू कर दिया है। वर्तमान में भूसे का रेट 900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है जबकि अभी गेहूं का सीजन है। इस बीच भूसा दो से तीन रुपये किलो बिकता था।
जानकारी के अनुसार पिछले तीन दिन पहले कालका में भूसा छह रुपये किलो था लेकिन वीरवार को यही दाम नौ रुपये तक पहुंच गया। आने वाले दिनों में भी भूसा और महंगा होने की संभावना है। गेहूं के भूसे का प्रयोग उद्योगों, मशरूम खाद बनाने के साथ चारे के रूप में किया जाता है।
भूसे के अधिक दाम होने से जिले के कई छोटे किसानों ने मशरूम उत्पादन भी बंद कर दिया है। वहीं जिले के अधिकतर पशुपालक गेहूं के भूसे के सहारे ही पशुओं को पाल रहे हैं। अब पशु चारे समेत अन्य फीड, तारा-मीरा, खल के दाम बढ़ने से पशु पालने से ही गुरेज करने लगे हैं।
पशुपालक हरीदत्त, ब्रिजमोहन, सीता राम, राम लाल, राजेंद्र, आदित्य, भूपेंद्र और सुरेश समेत अन्य किसानों ने बताया कि प्रशासन ने अभी तक भूसे के भाव नियंत्रित करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए हैं। इससे पशुपालन का खर्च बढ़ गया है जबकि दूध के दाम जस का तस हैं। एक दिन में एक गाय 12 से 15 किलो चारा समेत फीड और खल खाती है।