हिंदी पखवाड़ा पर आयोजित कवि सम्मेलन में प्रतिभागी कवि व साहित्यकार।
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सोलन। ...सिंध में सिंधी न हो और सधवा के बिंदी न हो, धिक्कार है मेरे बंधुओ! यदि हिंद में हिंदी न हो। देश में हिंदी का महत्व बताती डॉ. प्रेम लाल गौतम की इन पंक्तियों ने हिंदी के संवर्धन पर बल दिया। हिंदी पखवाड़े पर जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग ने बुधवार को सोलन में परिचर्चा और कवि गोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी ममता वर्मा ने की।
सत्र की शुरुआत व्यंग्यकार एवं लेखक अशोक गौमत के पत्र वाचन से हुई जिन्होंने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। कवि कुल राजीव पंत ने ...तुम्हारे शहर की बरसात में जो छाता भीगा था, अभी तक गीला है पंक्तियों से माहौल में रुमानियत भर दी।
नाटककार व लेखक संजीव अरोड़ा ने ..बढ़ चले कदम अंतरिक्ष की ओर, सुना है चांद पर बस्ती बसाएंगे.. कविता से जिंदगी की भागमभाग को दर्शाया। डॉ. शंकर वसिष्ठ ने सफेद झूठ जब बन जाता है बरगद कविता प्रस्तुत की।
वहीं, हेमंत अत्रि ने कैद सांसें मांग रहीं, अब मास्क से आजादी कविता से कोरोना काल में उपजी विभीषिका का वर्णन किया। शशिभूषण पुरोहित ने नग्गर गांव के सौंदर्य पर चित्रित कविता... वह फिर सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर आया.. प्रस्तुत की।
सुनीता शर्मा ने तिरंगे में लिपटे शहीद के लिए वो भीड़ सलाम बन जाती है, कविता से देश भक्ति का जज्बा दिखाया। सुखदर्शन ठाकुर ने बात करते हो दोस्ती की और दिल में रखते हो मलाल से समाज कर विसंगतियों पर तंज किया।
अर्पित सिसोदिया ने कुछ पूछे तो मत बताना कविता से महिलाओं की समस्याओं को उजागर किया। पूर्ण वर्मा ने उम्मीदें तो सब बनाते हैं कविता पेश की। केआर कश्यप ने अपनी कहानी भाईचारा का वाचन किया।