अर्की (सोलन)। प्रदेश में कोरोना बंदिशों पर लगभग विराम लग गया है। लोग आसानी से प्रदेश में कार्य कर रहे हैं, लेकिन अर्की अस्पताल में उपचार के लिए आए मरीजों को मजबूरन पहले कोविड टेस्ट करवाना पड़ रहा है, इस कारण उन्हें घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। ऐसा मामला सोलन के नागरिक अस्पताल अर्की में सामने आया है।
जहां पर मरीजों को ओपीडी में जाने से पहले कोविड टेस्ट करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मरीज किसी भी बीमारी के उपचार के लिए अस्पताल में पहुंच रहे हैं, लेकिन सबसे पहले रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाने के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद ही लोगों का ओपीडी में उपचार हो रहा है। इससे मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।
जानकारी के अनुसार जनवरी माह से नागरिक अस्पताल अर्की में ओपीडी में जाने से पहले रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। जैसे ही कोई मरीज नागरिक अस्पताल अर्की में इलाज के लिए आता है तो पहले कोविड रिपोर्ट लाने के फरमान जारी किए जाते हैं। वहीं, कोविड रिपोर्ट न लाने पर मरीजों को उपचार नहीं दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि कोरोना टेस्ट शिमला और सोलन अस्पतालों में नहीं हो रहे हैं, लेकिन नागरिक अस्पताल अर्की में लोगों से कोविड रिपोर्ट लाने के बाद ही सुविधा मिल रही है। उनका कहना है कि पहले लाइन में खड़े होकर पर्च बनवाते हैं। इसके बाद ओपीडी में जाने पर कोविड रिपोर्ट के लिए कहा जाता है। कोविड रिपोर्ट लेने के लिए घंटों भर इंतजार करना पड़ता है।
उधर, बीएमओ राधा शर्मा का कहना है कि चिकित्सा विभाग की ओर से टैस्ट करने के कोई आदेश नहीं मिले हैं। यदि कोई भी मरीज कोरोना टेस्ट नहीं करवाना चाहता है तो उसके लिए कोई बंदिश नहीं है। अस्पताल में सभी का इलाज आसानी से हो रहा है। संवाद
स्किन समस्या के लिए आए थे अस्पताल : जिया लाल
अर्की उपमंडल के गांव शाऊग के जिया लाल ठाकुर ने बताया कि वह स्किन की परेशानी को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। पहले उन्होंने पर्ची बनवाई और ओपीडी की लाइन में खड़े हो गए। काफी देर बाद चिकित्सक ने परामर्श के लिए बुलाया तो उन्हें कोरोना टेस्ट रिपोर्ट लाने के फरमान जारी कर दिया। रिपोर्ट लाने के बाद करीब तीन बजे के बाद इलाज की सुविधा मिली।
इनसेट
हड्डी रोग विशेषज्ञ से करवाने आए थे इलाज: तारा
मांझू गांव के तारा सिंह चौहान ने बताया कि वे पिछले दिनों पेड़ से गिर गए थे। जब अपना इलाज करवाने के लिए चिकित्सालय पहुंचे तो चिकित्सक ने कोविड टेस्ट करवाने के आदेश दिए उसके पश्चात उन्हें चेकअप किए गया।
15 दिन में चार बार करवाना पड़ा कोविड टेस्ट
बखालग के निवासी कैलाश ने बताया कि वह अपनी माता को लेकर बीते 15 दिनों में चार बार अस्पताल के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन जितनी बार भी अस्पताल पहुंचे उन्हें हर बार माता का कोरोना टेस्ट करवाना पड़ा।