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जीवनरक्षक टीकों के उत्पादन में मदद देगी सरकार : राम सुभग

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सोलन। मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने कहा कि केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) कसौली को सर्पदंश सहित अन्य जीवनरक्षक टीकों के उत्पादन के लिए सरकार हरसंभव सहायता देगी। वहीं संस्थान को अत्याधुनिक बनाने के लिए कार्य करेगी।
मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने शुक्रवार को केंद्रीय अनुसंधान संस्थान के 118वें स्थापना दिवस के कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि सीआरआई ने सर्पदंश, रैबीज के एंटीसीरा तैयार करने के साथ-साथ विभिन्न जीवनरक्षक टीके तैयार करने में सराहनीय कार्य किया है।
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कोविड-19 महामारी के समय में भी संस्थान ने प्रदेश में कोरोना जांच के लिए एकत्र दो लाख से अधिक आरटीपीसीआर परीक्षण किए। वहीं संस्थान में स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्यरत सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी (सीडीएल) के कार्य को सभी स्तरों पर सराहा गया।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 से बचाव के लिए तैयार 200 करोड़ से अधिक टीकों की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया। उन्होंने स्मारिका का विमोचन भी किया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं प्रो. डॉ. अतुल गोयल ने कार्यक्रम में ऑनलाइन शिरकत की। इस मौके पर संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. एके तलहन, अतिरिक्त उपायुक्त सोलन जफर इकबाल, उपमंडलाधिकारी कसौली डॉ. संजीव धीमान मौजूद रहे।
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1905 से कसौली में कार्य कर रहा संस्थान
सीआरआई कसौली की निदेशक डॉ. डिंपल कसाना ने संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि 1905 में अपनी स्थापना के समय से ही संस्थान जीवनरक्षक टीकों के उत्पादन में अग्रणी है। संस्थान भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और एनआईवी पुणे के सहयोग से कोरोना की चिकित्सीय एंटीसीरा के विकास की दिशा में भी कार्यरत है।
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