नालागढ़ (सोलन)। औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़, बद्दी और बरोटीवाला में करीब छोटे-बड़े 3200 उद्योग हैं। यहां उद्योगों के नाम पर बाजार में कई तरह के एसिड आसानी से मिल जाते हैं। बस आपकी थोड़ी-बहुत जान-पहचान होनी चाहिए। अगर आप पैसा ज्यादा देते हैं तो भी आपको कई तरह के एसिड मिल जाते हैं। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए आरोपी उद्योगों से भी एसिड चुरा लेते हैं। पुलिस इस जांच में जुटी है कि एसिड कहां से लिया गया। एसिड विक्रेताओं पर भी सख्ती बरतने की तैयारी है।
औद्योगिक राजधानी बीबीएन वैसे तो विश्व मानचित्र पर नाम दर्ज कर चुकी है, लेकिन आपराधिक ग्राफ के मामले में भी सुर्खियों में रहती है। यहां गोलीकांड, मर्डर, लूटपाट, अपहरण की घटनाओं समेत एसिड अटैक जैसी दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं। देश में एसिड अटैक के बाद सरकारों ने बेशक कानून सख्त कर दिया है लेकिन बीबीएन में सिरफिरे और बेखौफ आरोपियों को कानून का कोई भय नहीं है।
नालागढ़ के किरपालपुर में प्रवासी युवती पर एसिड अटैक का वाक्या सामने आया है जबकि इससे पहले 2017 में बीबीएन के बरोटीवाला के समीप बुरांवाला में एक सिरफिरे आशिक ने कोलकाता निवासी एक युवती पर तेजाब फेंका था। इन घटनाओं की पुनरावृत्ति होने से कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक ही है। परेशानी यह है कि बद्दी पुलिस के पास बहुत कम पुलिस कर्मचारी हैं। यह क्षेत्र पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा की सीमाओं से सटा है और 63 फीसदी प्रदेश को राजस्व देने वाला इलाका है।
प्रदेश सरकार ने 2009 में जिला सोलन से इस क्षेत्र को अलग करके यहां अलग से पुलिस जिला बना दिया है। हाल ही में योजना बोर्ड की बैठक में पुलिस कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठा। हकीकत यह है कि यहां एसपी समेत 305 पुलिस कर्मी तैनात हैं जो क्षेत्र की जनसंख्या और प्रवासियों की बहुतायत के चलते नाममात्र ही है। इस क्षेत्र में औद्योगिकीकरण के बाद काम की तलाश में देश के कोने कोने से प्रवासी यहां आए है। एक अनुमान के मुताबिक यहां डेढ़ से दो लाख प्रवासी कामगार कार्यरत है।
इनकी वेरिफिकेशन करना भी जहां पुलिस के लिए टेढ़ी खीर बना हुआ है, इन्हें भी वेरिफिकेशन न होने से किसी का कोई खौफ नहीं है। आसानी से प्रवासी वारदात को अंजाम देने के बाद न केवल रफूचक्कर हो जाते हैं बल्कि बाहर से आपराधिक घटना को अंजाम देने के बाद यहां शरण तक ले लेते हैं। पुलिस अधीक्षक रानी बिंदु सचेदवा ने कहा कि पुलिस एसिड अटैक के आरोपी की धरपकड़ के लिए पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। प्रवासियों के पंजीकरण को लेकर जिलाधीश के माध्यम से कई आदेश पारित किए हैं।
सीमांत क्षेत्र होने से बच जाते हैं अपराधी
बीबीएन से हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ सटा हुआ है। चंद मिनट में आरोपी हिमाचल से बाहर हो जाते हैं। पड़ोसी राज्य होने के कारण मदद देरी से मिलती है। अक्सर ऐसी वारदातों को अंजाम देने वाले आरोपी बाहरी राज्यों के होते हैं। पुलिस अब थानों और मकान देते समय वेरिफिकेशन पर जोर दे रही है।