बद्दी (सोलन)। नालागढ़ और ऊना में बनी दो दवाओं के सैंपल फेल होने के बाद सीडीएससीओ ने इनकी जांच शुरू कर दी है। सभी बिंदुओं की एक सूची बना कर उस पर बारीकी से ड्रग विभाग कार्य कर रहा है। विभाग का मानना है कि कई बार सैंपल कंपनी की गलती से फेल नहीं होते हैं बल्कि जहां पर दवाई भेजी जा रही वहां स्टोरेज के कारणों से भी सैंपल फेल हो जाते हैं।
इसके अलावा पिछले लंबे समय से हिमाचल की फार्मा कंपनियों के सैंपल न के बराबर हो रहे हैं। गौर हो कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से अक्तूबर में देश भर से 644 दवाओं के सैंपल एकत्र किए थे। इनमें से 636 दवाएं मानकों पर खरी उतरी हैं। इनमें मेसर्स थियोन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड सैणीमाजरा तहसील नालागढ़ की लाइनजोलिड-300 और मेसर्स स्टैंडर्ड लैबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड इंडस्ट्रियल एरिया मैहतपुर की नूहेंज टेबलेट का सैंपल फेल हुआ है।
सहायक दवा नियंत्रक हिमाचल मनीष कपूर ने बताया कि हिमाचल में दवा के सैंपल कम अनुपात में फेल हो रहे हैं जबकि यहां देश की 60 फीसदी दवा बन रही है। उन्होंने बताया कि जिन कंपनियों के सैंपल फेल हुए हैं, उनको नोटिस जारी कर बाजार से स्टॉक उठाने को कहा है।