अमर उजाला ब्यूरो
सोलन। कोविड काल के दौरान जिले में स्वास्थ्य सेवाएं स्टाफ के अभाव में चरमराने लगी हैं। खासकर आयुष विभाग में न तो पर्याप्त डॉक्टर और फार्मासिस्ट हैं और न ही लिपिकीय स्टाफ है।
हैरत की बात है कि पिछले करीब चार वर्षों से महज दो कनिष्ठ सहायक जिले के 78 आयुर्वेदिक केंद्रों का कामकाज देख रहे हैं। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में वरिष्ठ सहायकों के दो पद स्वीकृत हैं लेकिन ये पद तीन-चार वर्षों से खाली चल रहे हैं।
इसके अलावा कुछ डिस्पेंसरियां में न तो डॉक्टर और न ही फार्मासिस्ट सहित अन्य स्टाफ। 2017 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अर्की उपमंडल में दो जगह शीलघाट और मंज्याट में आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र खोल दिए लेकिन किराए के भवन में चल रही डिस्पेंसरियों में आज तक स्टाफ स्वीकृत नहीं हो सका है।
लोगों को मजबूरन अर्की या सुबाथू के स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार के लिए आना पड़ रहा है। लिपिकों के पद रिक्त होने से काम का बोझ कर्मचारियों पर बढ़ता जा रहा है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में वरिष्ठ सहायक के दो पद रिक्त हैं। एसडीएमओ कार्यालय नालागढ़ में वरिष्ठ सहायक का पद खाली चल रहा है।
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल के तहत दो अस्पताल, एक होम्योपैथी चिकित्सा केंद्र और एक यूनानी चिकित्सा केंद्र संचालित हैं। जिला आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. देशराज वर्मा ने बताया कि रिक्त पदों को लेकर निदेशालय के उच्चाधिकारियों को बताया है।
उधर, अतिरिक्त संयुक्त निदेशक आयुर्वेद रविंद्र शर्मा ने कहा कि रिक्त पद विभाग के संज्ञान में हैं। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही सभी पदों पर तैनाती की जाएगी।