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पांवटा इलाके की सात पेयजल योजनाओं का जलस्तर 30 फीसदी घटा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। प्रचंड गर्मी की तपिश के बीच मैदानी क्षेत्र आग उगल रहे हैं। ऐसे में लोग तो बेहाल हैं ही, पेयजल योजनाओं पर भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। लंबे समय से बारिश न होने से मैदानी इलाकों में भूमिगत जलस्तर में भी गिरावट आने लगी है।
पांवटा क्षेत्र की सात पेयजल योजनाओं में 30 फीसदी तक जलस्तर घट गया है। गर्मी की मार ऐसे ही पड़ती रही तो आने वाले समय में पानी के लिए हाहाकार मच सकता है। इन पेयजल योजनाओं से सीधे तौर पर जुड़ी तीन हजार की आबादी प्रभावित होगी। हालांकि, जलशक्ति विभाग का दावा है कि लोगों को दिक्कतें नहीं आने दी जाएगी। नए बोरवैल या साथ लगती योजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों को जोड़ा जाएगा।
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इन दिनों पांवटा साहिब क्षेत्र का तापमान 40 डिग्री से पार जा रहा है। इसका असर अब जलस्रोतों पर भी पड़ने लगा है। जलशक्ति विभाग की पांवटा क्षेत्र में कुल 161 पेयजल योजनाएं हैं। इनमें सात योजनाओं का जलस्तर 25-30 फीसदी कम हो चुका है। डोबरी सालवाला, खोदरी, डांडा आंज, बांगरण, अकालगढ़, शिवपुर और श्मायला पेयजल योजनाएं गर्मी से प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीण मनजीत सिंह, रमेश कुमार, अंकुश, राहुल, प्रताप सिंह और मोहन ने बताया कि जल संकट की आहट का कारण है भूमिगत जलस्तर घटना। पानी के चश्मे भी सूखने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल गुजारे लायक पानी आ रहा है, लेकिन जलस्तर और ज्यादा गिरा तो पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। क्षेत्र के कुछ हैंडपंपों में भी जलस्तर गिरा है।
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जलशक्ति विभाग के अधिशाषी अभियंता अरशद रहमान ने बताया कि क्षेत्र की सात पेयजल योजनाओं में जलस्तर 25 फीसदी तक कम होने की सूचना क्षेत्रों से मिली है। बांगरण, अकालगढ़ और सालवाला समेत कुछ स्थानों में सात ईंच के नए बोरवैल किए जा रहे हैं। ताकि पुरानी योजनाओं में दिक्कतें आने पर इनसे पानी की किल्लत दूर हो सके। कुछ योजनाओं को साथ लगती स्कीमों से जोड़ने की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है।
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