जल-जंगल-जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने एकजुट होकर लिया फैसला
बांध स्थल पर किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं बिना इजाजत ड्रोन उड़ाने पर होगी कानूनी कार्रवाई
मोहराड़ में होगी एक नवंबर को होगी बैठक, किशाऊ बांध संघर्ष समिति का गठन कर बनेगी रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में शिलाई उपमंडल के मशवाड़ गांव में ग्रामीणों ने आवाज बुलंद की है। ग्राम पंचायत चामरा मोहराड़ के मशवाड़ में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि वे किसी भी कीमत पर बांध का निर्माण नहीं होने देंगे। किशाऊ बांध विरोधी आंदोलन को संगठित करने के लिए अगली बैठक 1 नवंबर को दोपहर 12 बजे मोहराड़ गांव में होगी। इसमें किशाऊ बांध संघर्ष समिति का गठन कर आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।
शिलाई पंचायत समिति की चेयरमैन विनीता चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्रामीणों ने जल-जंगल-जमीन, मातृभूमि और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष का संकल्प लिया। बैठक में परियोजना के बहिष्कार और बांध स्थल पर काम नहीं होने देने का निर्णय लिया गया।
बैठक में ग्राम पंचायत चामरा मोहराड़ की प्रधान किरण चौहान, उपप्रधान नारायण पांडे, पूर्व उपप्रधान प्रताप सिंह चौहान व नरेंद्र सिंह चौहान और पंचायत सदस्य बीजा राम सहित कई ग्रामीण शामिल हुए। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कैप्टन दीवान सिंह नेगी, सोहन सिंह चौहान, अधिवक्ता बलवीर चौहान, संतन नेगी, नारायण सिंह नेगी, वीरेंद्र सिंह नेगी और भगत सिंह भंडारी ने भी भाग लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से परियोजना का विरोध करने और जमीन, प्राकृतिक संसाधनों व सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने का निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना को लेकर उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
बांध स्थल पर नहीं होने देंगे काम
ग्रामीणों ने बांध स्थल पर किसी भी तरह का काम नहीं होने देने का ऐलान किया। साथ ही, बिना अनुमति ड्रोन से की जाने वाली गतिविधियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से निजी या सार्वजनिक अधिकारों का हनन होने पर पुलिस थाना शिलाई में शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों और क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने से भी पीछे नहीं हटेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जल-जंगल-जमीन, मातृभूमि और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा उनके लिए सर्वोपरि है।