राजगढ़ (सिरमौर)। इटरनल विश्वविद्यालय बड़ूसाहिब में सतत अर्थव्यवस्था के लिए जल, कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को आगाज हुआ।
इटरनल विश्वविद्यालय के डॉ. खेम सिंह गिल कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर ने इस सम्मेलन का आयोजन किया है। सम्मेलन में भारत के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, मोरक्को के प्रख्यात वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद शामिल हुए।
सम्मेलन के शुभारंभ मौके पर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कृषि शोधकर्ता पंजाब सिंह कुलपति रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तरप्रदेश ने कहा कि देश में सतत कृषि की समस्याओं के चार मुख्य समाधानों में कृषि उत्पादन से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करना, मिट्टी, पानी आदि जैसे प्राकृतिक संसाधनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना, नवीनतम तकनीक ड्रोन का प्रयोग कृषि उत्पादन में करना और अधिक से अधिक युवाओं को कृषि से जोड़ना प्रमुख है।
लखनऊ के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडे ने भारत में पानी की स्थिति के बारे में कुछ उल्लेखनीय तथ्य साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे अधिक जल संकट वाले देशों में से एक है। इसका अर्थ है कि देश की दो-तिहाई आबादी के पास संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पीने का पानी नहीं है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. स्वरूप के चक्रवर्ती पश्चिम बंगाल ने कहा कि तीन मुख्य तरीके हैं जिनसे हम स्थायी कृषि प्राप्त कर सकते हैं। उसमें न्यूनतम यांत्रिक मिट्टी की हलचल, फसलों का विविधीकरण और फसल का फसल के साथ स्थायी मिट्टी का आवरण प्रमुख है। इस दो दिवसीय सम्मेलन के लिए दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, कोयंबटूर, पंजाब, नागालैंड, चंडीगढ़, तेलंगाना, दुबई, मैक्सिको के निजी कृषि विश्वविद्यालयों और संस्थानों के 200 से अधिक छात्रों ने पंजीकरण किया है।