-मिनी जू में एक दशक बाद सुनाई दी टाइगर की दहाड़
-दो अक्तूबर से पर्यटकों के लिए खुलेगा बाड़ा
-1.67 करोड़ से तैयार हुआ आधुनिक इंक्लोजर और 32 लाख का वन्य प्राणी अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। मिनी जू रेणुकाजी में एक दशक बाद फिर टाइगर की दहाड़ सुनाई दी है। महाराष्ट्र के नागपुर से टाइगर का जोड़ा करीब 1800 किलोमीटर का सफर तय कर रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे रेणुकाजी पहुंचा। हालांकि अभी पर्यटकों को इनके दीदार के लिए 10 दिन और इंतजार करना होगा। वन्य प्राणी विभाग ने दोनों टाइगरों को फिलहाल इनडोर वार्ड में रखा है। दो अक्तूबर से इन्हें पर्यटकों के लिए बाड़े में छोड़े जाने की तैयारी है।
टाइगरों का जोड़ा 18 सितंबर की रात महाराष्ट्र से विशेष वाहन से रेणुकाजी के लिए रवाना हुआ था। वाहन से उतारकर उन्हें सुरक्षित तरीके से बाड़े के इनडोर वार्ड में शिफ्ट करने में करीब एक घंटे का समय लगा। पूरे सफर के दौरान टाइगरों के विश्राम, भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी भी टाइगरों के साथ रहे।
रेणुकाजी पहुंचने के बाद दोनों टाइगरों को करीब 450 वर्ग मीटर क्षेत्र में तैयार किए गए बाड़े के इनडोर वार्ड में रखा गया है। यहां अगले 10 दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में उनके स्वास्थ्य और नए वातावरण के अनुकूलन पर नजर रखी जाएगी। टाइगरों के पहुंचने से मिनी जू रेणुकाजी में करीब एक दशक से चला आ रहा इंतजार खत्म हो गया है। विभाग को उम्मीद है कि टाइगरों के नए जोड़े के कारण रेणुका आने वाले पर्यटकों के आकर्षण में बढ़ोतरी होगी।
वन्य प्राणी विभाग ने टाइगरों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस इंक्लोजर तैयार किया है। सिंह विहार के एक हिस्से में करीब 1.67 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक बाड़ा बनाया गया है, जबकि 32 लाख रुपये की लागत से वन्य प्राणी अस्पताल तैयार किया गया है। विभाग के अनुसार आधुनिक बाड़े में भविष्य में चार टाइगरों को रखने की क्षमता है।
वन्य प्राणी मंडल शिमला के डीएफओ डॉ. शाहनवाज अहमद भट्ट ने नागपुर से टाइगर के जोड़े के रेणुकाजी पहुंचने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि फिलहाल दोनों को इनडोर वार्ड में रखा गया है और करीब 10 दिन चिकित्सकों की निगरानी में रखने के बाद दो अक्तूबर से पर्यटकों के लिए बाड़े में छोड़ा जाएगा।
रेणुकाजी मिनी जू में टाइगर को उतारते विभाग के कर्मचारी। संवाद