बार-बार नोटिस देने पर लोग जमा नहीं करवा रहे बकाया
आर्थिक तंगी से जूझ रही नगर परिषद के लिए गृहकर वसूलना टेढ़ी खीर
धर्म सिंह तोमर
नाहन (सिरमौर)। काेलकाता के बाद दूसरी सबसे पुरानी नगर परिषद नाहन आर्थिक तंगी से जूझ रही है। नगर परिषद को अपना ही पैसा समय पर नहीं मिल पा रसी है, जिससे शहर के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अब नगर परिषद लगभग 80 लाख रुपये के गृहकर वसूलने के लिए नए सिरे से सर्वे करने की तैयारी कर रही है।
नगर परिषद नाहन का हर साल गृहकर का वसूली का आंकड़ा बढ़ रहा है। अब आंकड़ा लगभग एक करोड़ के करीब पहुंच गया है। नोटिस भी अकसर बेअसर साबित हो रहे हैं। ऐसे में नगर परिषद नए सिरे से शहर में गृहकर को लेकर सर्वे करने की योजना बना रही है। सरकार द्वारा तय किए नए मापदंडों के अनुसार सर्वे होगा। परिषद किसी एजेंसी को भी इसकी जिम्मेदारी सौंप सकती है ताकि कार्य शीघ्र पूरा किया जा सके।
शहर लगातार फैल रहा है। वर्ष 1868 में रिसायतकाल के दौरान बनी नगर परिषद के अधीन यहां केवल पहाड़ पर बने घर थे। अब शहर बनोग तक फैल गया है। शहर में प्लॉटिंग का काम तेज गति से चल रहा है। रेणुका बांध को लेकर काम तेज होने के बाद इस प्रक्रिया में और तेजी आई है। बड़ी संख्या में लोग यहां बसने लगे हैं। इसके अलावा शिक्षा, अन्य सुविधाओं और नौकरीपेशा लोगों के आने से भी शहर में आबादी बढ़ी है। ऐसे में नगर परिषद की आमदनी बढ़ रही है, लेकिन गृहकर वसूली चुनौती बनती जा रही है। शहरवासी भी अकसर नगर परिषद की गृहकर वसूली में खामियों का हवाला देते रहे हैं। नगर परिषद एनओसी आदि जारी करने के दौरान गृहकर वसूलती है।
अपने ही भवन का निर्माण लटका
आर्थिक तंगी का आलम यह है कि नगर परिषद के अपने बहुमंजिला कार्यालय भवन का निर्माण बजट की कमी के कारण लटका है। वर्तमान में केवल दो तल की पार्किंग ही नगर परिषद बना पाई है। नगर परिषद लगभग 3-4 वर्षों से अपना कार्यालय विश्राम गृह में चला रही है। इसके लिए परिषद सरकार की तरफ टकटकी लगाए हुए है।
नगर परिषद का लगभग 80 लाख रुपये का गृहकर लंबित है। गृहकर की वसूली के लिए सर्वे करवाने की योजना बनाई जा रही है। एजेंसी से सर्वे पर भी विचार किया जा रहा है। पैसों की कमी से विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
-संजय कुमार, वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद नाहन