जिला सिरमौर में सड़क हादसे हर साल लोगों की जान लेकर प्रशासनिक और तंत्र की लापरवाही को उजागर कर रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कारणों की जांच होती है, बैठकों में गंभीर चर्चाएं भी होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर उसी ढर्रे पर लौट आते हैं। लापरवाही का नतीजा यह है कि हर साल छोटे बच्चे, युवा और आम लोग अपनी कीमती जिंदगियां गंवा रहे हैं।
स्थानीय निवासी विक्रम कुमार, रजनीश और रमन का कहना है कि जिले के उच्च पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है। कई स्थानों पर सड़कें बेहद संकरी हैं और अधिकतर हिस्सों में सुरक्षा के लिए पैरापिट तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में यदि किसी वाहन का संतुलन बिगड़ता है तो उसे रोकने की कोई व्यवस्था नहीं होती और वाहन सीधे सैकड़ों मीटर गहरी खाइयों में जा गिरते हैं।
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लोगों का कहना है कि जिले में हर साल दर्जनों सड़क हादसे हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो सड़कों की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है और न ही खतरनाक मोड़ों पर सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। तीखे मोड़, कमजोर सड़कें और सुरक्षा इंतजामों की कमी हादसों का बड़ा कारण बन रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हादसों के बाद सिर्फ जांच और औपचारिकता तक सीमित न रहा जाए, बल्कि संवेदनशील और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सिरमौर यूं ही हर साल लापरवाही की कीमत लोगों की जान से चुकाता रहेगा।