नाहन में पत्रकार वार्ता में दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार। संवाद
- फोटो : NAHAN
नाहन (सिरमौर)। दलित शोषण मुक्ति मंच गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिए जाने के विरोध में नहीं है, लेकिन वहां रह रहे अनुसूचित जाति और ओबीसी वर्ग के अधिकारों को लेकर चिंतित जरूर हैं। यह बात नाहन में प्रेसवार्ता में दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला संयोजक आशीष कुमार ने कही।
आशीष कुमार ने कहा कि जिले के शिलाई, राजगढ़ और रेणुका में अनुसूचित जाति वर्ग के 1,76,000 लोग रहते हैं। इस वर्ग पर आज भी जातीय आधार पर अत्याचार हो रहे हैं। इसी आधार पर हाल ही में दो लोगों की हत्या तक की गई। चंद दिन पहले ही जातीय आधार पर भोजन परोसने की मंच पर लगे लाउडस्पीकर से घोषणा तक की गई। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिला में बलात्कार, अत्याचार और मार-पिटाई के तीन वर्षों में 90 प्रतिशत से ज्यादा घटनाएं राजगढ़, शिलाई और संगड़ाह क्षेत्र में ही हुई है। यह भी सामने आया है कि जिन क्षेत्रों को जनजातीय दर्जा दिया है वहां अब अत्याचार के मामले सामने नहीं आ रहे हैं।
ऐसे में अनुसूचित जाति और ओबीसी वर्ग को डर है कि उनके अधिकार समाप्त कर दिए जाएंगे। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाए कि जातीय आधार पर अत्याचार और पंचायतीराज चुनाव प्रणाली में मिलने वाला आरक्षण यथावत रहे। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर मंच ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री और केंद्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा को भी पत्र भेजा है। इस दौरान क्रिश्चियन कम्युनिटी के अध्यक्ष प्रवीण सोढ़ा, दलित शोषण मुक्ति मंच के जिला सदस्य जगदीश पुंडीर और राम सिंह भी मौजूद रहे।