तीन पीढि़यों से रक्षाबंधन की रिवायत को निभा रहा हिंदू-मुस्लिम परिवार
समाज में नफरत का जहर घोल रही ताकतों के मुंह पर तमाचा है ये भाई-बहन
आजादी से पहले शुरू हुआ था राखी बांधने का सिलसिला, तीसरी पीढ़ी तक पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी
सतौन (सिरमौर)। समाज में आज जहां कुछ लोग हिंदू-मुस्लिम के नाम पर नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं, वहीं सतौन में एक हिंदू और मुस्लिम परिवार ऐसा भी है जो इन नफरतवादी ताकतों के मुंह पर तमाचे से कम नहीं है।
दरअसल, यहां पर हिंदू परिवार के साथ एक मुस्लिम परिवार लगातार राखी बांधने की रस्म निभा रहा है। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर राखी बांधने का यह सिलसिला एक-दो वर्षों से नहीं बल्कि आजादी के पहले से चला आ रहा है।
दरअसल, आजादी से पूर्व सतौन पंचायत के पूर्व प्रधान रजनीश चौहान के दादा पूर्व प्रधान स्वर्गीय अमर सिंह चौहान भंगानी से एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति बजीरुदीन को सतौन लेकर आए। उन्हें रहने के लिए जमीन भी दी। बजीरुदीन उस समय कोल्हू (तेल निकालने का कार्य) का कार्य करता था।
बजीरुदीन की पत्नी उस समय अमर सिंह चौहान को रक्षा बंधन पर राखी बांधती थी। उनके इस दुनिया से चले जाने के बाद उसकी बेटी रसीदा ने यह प्रथा आगे बढ़ाई। रसीदा ने अमर सिंह चौहान के पुत्र रघुबीर सिंह चौहान (पूर्व प्रधान) को राखी बांधी। रघुबीर सिंह चौहान के देहांत के बाद रसीदा ने इस प्रथा को बंद नहीं किया बल्कि उनके बेटे रजनीश चौहान को राखी बांध कर यह पर्व मनाना शुरू किया।
साल 2023 में रक्षा बंधन के त्योहार के दो-तीन दिन बाद रसीदा का देहांत हो गया। अब दो साल से रसीदा की बेटी हिना इस रस्म को निभा रही है। हिना इस साल भी सतौन आई और रजनीश चौहान को राखी बांधी। यह तीसरी पीढ़ी है, जो इस पर्व को धर्म देखे बिना एक दूसरे के साथ मना रहे हैं, भाई-बहन का रिश्ता निभा रहे हैं।
रजनीश चौहान ने बताया कि तीन पीढ़ी से उनका परिवार, मुस्लिम परिवार के साथ राखी का पर्व मना रहे हैं। आजादी से पहले की यह प्रथा आज भी कायम है और आगे भी रहेगी।
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