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जनजातीय क्षेत्र की मांग को लेकर एक जनवरी को होगी महापंचायत

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रोनहाट में आयोजित खुमली के दौरान जनजातीय दर्जे की मांग पर रणनीति तैयार करते ग्रमीण। - फोटो : NAHAN
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हरिपुरधार/रोनहाट (सिरमौर)। जौनसार बाबर की सीमा से सटे सिरमौर के रोनहाट कस्बे में एक जनवरी को जनजातीय दर्जे की मांग को लेकर 14 पंचायतों के हाटियों की महापंचायत होगी। इसमें लाधी क्षेत्र की 14 पंचायतों के सैकड़ों हाटी एकजुट होकर गिरिपार को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने के लिए जंग एलान का करेंगे। यह निर्णय रोनहाट में संपन्न हुई हाटियों की खुमली (बैठक) में लिया गया।
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रोनहाट में आयोजित बैठक में उपस्थित क्षेत्र के प्रबुद्घ लोगों ने कहा कि गिरिपार क्षेत्र के इस प्रमुख मामले में लोगों को पिछले 55 वर्षों से छला जा रहा है। 5 मई 2017 को केंद्रीय जनजाति मामलों के मंत्री जुओल राम ने हरिपुरधार क्षेत्र में गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की घोषणा की थी क्योंकि उस दौरान प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे।
चुनावी फायदा उठाने के उद्देश्य से मंत्री ने तो यह भी घोषणा कर दी थी कि विधानसभा चुनाव होने से पहले ही गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा प्रदान हो जाएगा लेकिन घोषणा अफवाह साबित हुई। बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय हाटी समिति के पदाधिकारी वीरेंद्र शर्मा ने गिरिपार क्षेत्र की लगभग 144 पंचायतों के करीब तीन लाख से अधिक हाटी 1967 से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। 55 वर्षों बाद भी हाटियों को अपना हक नहीं मिल पाया है।
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किसान नेता हरिराम शास्त्री, शिलाई के पूर्व बीडीसी चेयरमैन मस्तराम पराशर और गंगाराम सिंगटा ने कहा कि गिरिपार से सटे उत्तराखंड के जौनसार बाबर क्षेत्र और सिरमौर जिले के गिरिपार की वेशभूषा, संस्कृति व रहन-सहन एक जैसा है। दोनों क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां भी एक समान हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि गिरिपार क्षेत्र के लोग अब चुप नहीं बैठेंगे। अपना हक पाने के लिए अब आर-पार की लड़ाई लडे़ंगे।
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