पैकिंग के बाद बाजार में पहुंची स्ट्राबेरी।
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नाहन (सिरमौर)। पिछले साल के मुकाबले इस मर्तबा बागवानों का रुझान स्ट्राबेरी की ओर बढ़ा है। इस साल 300 के करीब किसान और बागवान इससे जुड़े हैं। यह आंकड़ा गत वर्ष का मुकाबले काफी अधिक है।
इस समय में जिले में 30-32 हेक्टेयर जमीन में स्ट्राबेरी की खेती की गई है। बाजार में स्ट्राबेरी के दाम 50 से 70 रुपये प्रति पैकेट मिल रहे हैं। इस बार बागवानी विभाग ने ढाई करोड़ रुपये के करीब स्ट्राबेरी उत्पादकों की आमदनी का अनुमान लगाया है।
बता दें कि जिले के मैदानी इलाके खासकर पांवटा साहिब क्षेत्र स्ट्रॉबेरी के उत्पादन के लिए अच्छा माना जाता है। नाहन के कुछ हिस्सों में भी इसकी खेती की जाती है। यहां की स्ट्रॉबेरी हिमाचल समेत पड़ोसी राज्यों में भी सप्लाई की जा रही है। उद्यान विभाग के अनुसार पिछले साल करीब 150 बागवानों ने ही स्ट्रॉबेरी की खेती की थी। इससे बागवानों को डेढ़ करोड़ की आमदनी हुई थी। इस बार इसकी खेती की तरफ रुझान बढ़ा है। इस साल शुरूआती दौर में बारिश अधिक होने से कुछ बागवानों को नुकसान भी उठाना पड़ा। जिला में स्ट्रॉबेरी की महत्वपूर्ण किस्म केमोरोजा, विंटरडोन आदि उगाई जाती हैं। इनका उत्पादन काफी अच्छा है।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि जिला के राजगढ़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की पौध तैयार की जाती है और मैदानी इलाके में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन होता है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती जल्द नष्ट होने वाली होती है। लिहाजा बागवान इसका उत्पादन या तो मार्किट के हिसाब से करते हैं या फिर उद्यान केंद्रों के आसपास इसकी खेती की जाती है। इस बार पांवटा साहिब व नाहन के मैदानी क्षेत्र में 30 हेक्टेयर भूमि में करीब 250 से 300 किसान-बागवानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती की है। किसान-बागवानों को साढ़े 62 हजार रुपये की सब्सिडी साढ़े 12 बीघा खेती के लिए सरकार दी है।