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मेडिकल कालेज नाहन में हुई पहली सफल लैपरोस्कोपिक सर्जरी

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नाहन (सिरमौर)। मेडिकल कॉलेज नाहन में पहली सफल लैपरोस्कोपिक सर्जरी हुई। गत्ताधार क्षेत्र की 26 वर्षीय नारदा देवी लंबे समय से पित्त की थैली में पथरी की समस्या से परेशान थी। कॉलेज के असिस्टेंट प्रो. डा. शैलेंद्र कौशिक की टीम ने इस सर्जरी को बखूबी तरीके से अंजाम दिया।
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डॉ. शैलेंद्र के अनुसार लैपरोस्कोपिक सर्जरी यानी दूरबीन की मदद से होने वाली सर्जरी से रोगी के शरीर के कम हिस्से की चीरफाड़ होती है। ऑपरेशन के बाद जख्म जल्द ही ठीक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में इस सर्जरी के लिए रोगियों को हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
लेकिन, अब सरकारी स्तर पर यह सुविधा जिले में उपलब्ध हो जाने के बाद यहां के लोगों को सुविधा मिलेगी। बता दें कि डॉ.वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज नाहन को हाल ही में सरकार ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत वाली लैपरोस्कोपिक मशीन मुहैया करवाई है। लिहाजा, अब यहां दूरबीन वाले ऑपरेशन की सुविधा शुरू हो गई है।
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अभी तक जिले से इस सर्जरी के लिए रोगी या तो निजी अस्पतालों का रुख करते थे या फिर आईजीएमसी शिमला या चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में पंहुचते थे। ओपन सर्जरी की अपेक्षा लैपरोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन से सर्जरी) ज्यादा सुरक्षित और दर्दरहित मानी जाती है। इसमें मरीज को परेशानी भी कम होती है।
सामान्यत: वह 24 से 72 घंटे में ही चलने फिरने की स्थिति में आ जाता है। अब तक मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा मौजूद नहीं थी। लेकिन, लैपरोस्कोपिक मशीन उपलब्ध होने से यहीं मरीजों को सुविधा आसानी से मिलेगी।
मेडिकल कॉलेज के चिकित्साअधीक्षक डॉ. श्याम कौशिक ने बताया कि सरकार ने मेडिकल कॉलेज के ऑपरेशन थियेटर केलिए करीब डेढ़ करोड़ की लागत वाली लैपरोस्कोपिक मशीन उपलब्ध करवाई है। ऐसे में अब एकछोटे से चीरे से दूरबीन के माध्यम से ऑपरेशन संभव हो सकेंगे।
उन्होंने बताया किमेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए सरकार प्रयासरतहै। उन्होंनेबताया कि मेडिकल कालेज में लैपरोस्कोपिक मशीन से पहली सफल सर्जरी की गई है।विशेषज्ञ चिकित्सकों ने इस सर्जरी को कडी मेहनत से अंजाम दिया।
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