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किसानों को मिल रहे मौसम अपडेट से बदल रहा खेती का तरीका

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सिरमौर के कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं में स्थापित अत्याधुनिक स्वचालित मौसम वेधशाला। संवाद - फोटो : NAHAN
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संवाद न्यूज एजेंसी
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नाहन (सिरमौर)। जनपद सिरमौर के किसानों की खेती का तरीका अब मौसम के अनुसार बदल रहा है। कब बारिश होगी, बिजाई के लिए मौसम उपयुक्त है या नहीं? जमीन में आर्द्रता और तापमान संबंधी हर तरह की जानकारी से जिले के किसान अपडेट हो रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं में स्थापित स्वचालित मौसम केंद्र से मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है। इसके लिए सभी छह विकास खंडों के करीब 2,500 किसानों को व्हाट्सएप समूहों से जोड़ा गया है। इस तरह की जानकारी मिलने से किसानों को मौसम परिवर्तन से होने वाले फसलों पर प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद मिल रही है।
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बता दें कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली और भारतीय मौसम विभाग के सौजन्य से धौलाकुआं में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में अत्याधुनिक स्वचालित मौसम केंद्र गत वर्ष के सितंबर माह में स्थापित किया गया है। प्रदेश के मंडी व बिलासुुर में भी ये केंद्र स्थापित किए गए हैं। सेटेलाइट व जीपीएस आधारित स्वचालित मौसम केंद्र की पल-पल की निगरानी पुणे से की जा रही है। हर 15 मिनट के बाद इससे अपडेट मिलती है, जिसे मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) कार्यालय को भेजा जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज कुमार मित्तल और विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. भीम पारिक ने बताया कि किसानों को जिले के मौसम संबंधी जानकारियां दी जा रही हैं। इसके लिए किसान व्हाट्सएप समूहों से जोड़े गए हैं। हर मंगलवार और शुक्रवार को आगामी पांच दिनों के मौसम का पूर्वानुमान भी फोन पर दिया जा रहा है। यह जानकारी किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है।
नमी और तापमान की मिल रही सटीक जानकारी
अतिरिक्त उपायुक्त सिरमौर मनेश कुमार भी स्वचालित मौसम केंद्र का दौरा कर चुके हैं। जहां उन्होंने इसके बारे में जानकारी ली। एसएमएस भीम पारिक ने बताया कि इस केंद्र में अधिकतम व न्यूनतम तापमान, तीन मीटर से 10 मीटर ऊंचाई पर हवा की गति व हवा की दिशा, हवा में नमी की मात्रा, सूर्य की चमक, वर्षा की मात्रा मृदा में 10 सेंटीमीटर, 30, 70 और 100 सेंटीमीटर गहराई तक नमी व तापमान का पता चल रहा है।
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इस अत्याधुनिक मौसम वेधशाला से कृषि क्षेत्र में उपयोग की जाने वाली क्रियाएं जैसे खेत की तैयारी, बिजाई, सिंचाई, खादों का छिड़काव, खरपतवारनाशी व कीटनाशकों का छिड़काव आदि क्रियाओं के प्रयोग के उपयुक्त समय के बारे में बता सकते हैं, जिससे मौसम परिवर्तन से होने वाले फसलों पर विपरीत प्रभाव को कम करके फसल उत्पादन व उत्पादकता को बढ़ाया जा सकेगा।
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