बुंदेलखंड में कम हो रही हाथियों की संख्या
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा वन क्षेत्र के बहराल में 2 माह पहले एक हाथी की संदिग्ध मौत हो गई थी। इस मामले की उत्तराखंड के देहरादून लैब से रिपोर्ट मिल गई है जिसमें मौत का कारण कीटनाशक दवा से मौत बताई जा रही है।
माना जा रहा है कि गेहूं की फसल में पेस्टीसाइड स्प्रे की गई थी। उत्तराखंड से पहुंचे हाथी ने इस गेहूं की फसल को खा लिया जिससे हाथी की मौत हो गई। वन विभाग की टीम को कुछ दूरी पर दो पक्षी भी मृत मिले थे। वन्य प्राणी प्रेमी गजराज की मौत के कारण को जानना चाहते थे। इसलिए उत्तराखंड से एफएसएल लैब की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे थे।
बतातें चलें कि 24 जनवरी 2017 को बहराल में 1 हाथी संदिग्ध रुप से खेत में मृत मिला था जिससे कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। कुछ फसलों के उजाड़ने को लेकर परेशान किसानों द्वारा जानबूझ कर हाथी को जहर खिलाने तो कुछ कीटनाशक दवा छिड़काव वाले गेहूं की फसल खाने से मौत की आशंका जता रहे थे। इस मामले में डीएफओ पांवटा के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। टीम की देखरेख में मृत हाथी का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद खेत में ही दफना दिया गया था। 25 जनवरी को पोस्टमार्टम से दफनाने तक की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हुई थी। उत्तराखंड के राजाजी पार्क देहरादून से सीनियर वैटनरी डॉक्टर अदिति शर्मा व स्थानीय वैटनरी डॉक्टर अमित राजटा की टीम ने हाथी का पोस्टमार्टम किया।
सैंपल वाइल्ड लाइफ इंस्टीच्यूट देहरादून तथा बरेली आईडीआरआई एफएसएल लैब में जांच को भेज दिए गए। उधर, डीएफओ पांवटा एसएस राणा ने पुष्टि की है। डीएफओ ने कहा कि उत्तराखंड एफएसएल लैब से रिपोर्ट मिल गई है। हाथी की मौत का कारण पेस्टीसाइड दवा रहा है। संभवता बहराल में कीटनाशक दवा स्प्रे वाली गेहूं फसल खा लेने से हुई है।