पानी के विवाद में बवाल : एससीएसटी एक्ट
में आरोप तय आरोपियों ने कहा, झूठा केस
- 19 मार्च 2025 को राजगढ़ क्षेत्र में पानी के स्रोत को लेकर हुआ था विवाद
- पाइप तोड़कर चोरी करने सहित धमकी देने के भी लगे हैं आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
पानी के स्रोत को लेकर चल रहे विवाद ने आपराधिक रूप ले लिया। पाइप लाइन तोड़ने, जातिसूचक गालियां देने और धमकी देने के मामले में अदालत ने आरोपी कैलाश कुमार एवं अन्य के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए मुकदमा लड़ने की बात कही है। अब मामले में 16 मई 2026 को साक्ष्य तय किए जाएंगे।
यह मामला राजगढ़ क्षेत्र में पानी के स्रोत को लेकर है। दरअसल, 3 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत अदालत से पीड़ित को पानी के स्रोत से पाइप लाइन बिछाने की अनुमति मिली थी। उसने करीब 50 फीट पाइप बिछाई। आरोप है कि 19 मार्च 2025 को आरोपी मौके पर पहुंचे और पाइप को क्षतिग्रस्त कर अपने साथ ले गए। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उसे सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया। साथ ही उसे धमकी भी दी गई। इस दौरान राजगढ़ थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 326(a), 303(2), 352, 351(3), 190 और 191(2) सहित एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(s) मामले की जांच कर आरोप-पत्र (चार्जशीट) अदालत में पेश किया।
आरोपियों ने अदालत में दावा किया कि मामला केवल जमीन और पानी के स्रोत से जुड़ा सिविल विवाद है। इसे गलत तरीके से आपराधिक रंग दिया गया है। उन्होंने एफआईआर को झूठा और बदले की भावना से दर्ज बताया। विशेष न्यायाधीश योगेश जसवाल ने साफ कहा कि उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त हैं। इस स्तर पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत नहीं होती। सभी आरोपियों को आरोप पढ़कर सुनाए गए, लेकिन उन्होंने दोष स्वीकार नहीं किया।