दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हिमाचल से राज्यसभा में भेजने का मसला कैसे अटका? इस पर हिमाचल कांग्रेस के भीतर कई तरह के तर्क हैं। उनकी दावेदारी को कांग्रेस का एक धड़ा समर्थन दे रहा था तो दूसरा विरोध।
कहते हैं कि दो कैबिनेट मंत्रियों ने हाईकमान तक यह बात पहुंचाई कि दिल्ली में जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी तो हिमाचल के सेब बागवानों से आजादपुर मंडी में कमीशन वसूली होती थी।
बार- बार मसला उठाने के बावजूद दिल्ली सरकार ने साथ नहीं दिया। एक मंत्री ने अपनी बात सोनिया गांधी को पत्र लिखकर बताई। दूसरे ने तर्क दिया कि हाल ही में दिल्ली में शीला सरकार का जो हाल हुआ है, उसे देखते हुए हिमाचल की एकमात्र सीट से किसी बाहरी की दावेदारी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है।
भाजपा सरकार ने जब दिल्ली के केएल शर्मा को हिमाचल से सांसद बनाकर भेजा था तो कांग्रेस ने हर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किए थे। ऐसे में डर ये भी था कि कहीं भाजपा अब इसे मुद्दा न बनाए।
इसके बाद दावेदार कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू थे, लेकिन उन्हें राहुल गांधी ने संगठन में काम करने की हिदायत देते हुए रोक दिया।
ऐसे में एकमात्र महिला दावेदार के तौर पर विप्लव के हाथ बाजी लगी। कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू ने बताया कि उन्हें शीला दीक्षित को लेकर लिखे गए पत्रों की जानकारी नहीं है। अधिकांश कांग्रेस नेता बाहरी को भेजने के पक्ष में नहीं थे।