वर्तमान में यूटी चंडीगढ़ और पुडुचेरी में इस योजना को लागू किया गया है। अब पायलट कार्यक्रम में इसे हिमाचल और मध्यप्रदेश में लागू करने की योजना है। इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वास्थ्य अथॉरिटी की ओर से स्थानीय पुलिस, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पैनलबद्ध अस्पतालों के समन्वय से किया जाएगा। इस संबंध में नेशनल हेल्थ एजेंसी (एनएचए) और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से आवश्यक प्रशिक्षण कार्य किए जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक की ओर से समस्त प्रदेश के समस्त सीएमओ और एमएस को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
दुर्घटना के बाद का समय गोल्डन ऑवर्स
सड़क हादसों के दौरान पीड़ितों को जल्द इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। दुर्घटना के बाद का समय गोल्डन ऑवर्स कहलाता है। मगर इस दौरान इलाज न मिल पाने के कारण कई मरीजों की मौत हो जाती है। इसे ही कम करने के लिए कैशलेस उपचार प्रदान करने के लिए एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सड़क दुर्घटना से संबंधित मौतों और चोटों को आधा किया जाए। समय पर चिकित्सा उपचार प्रदान करना, विशेष रूप से गोल्डन अवधि के दौरान कीमती जीवन को बचाया जा सकेगा।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से योजना तैयार की गई है। सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को डेढ़ लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार दिया जाएगा। कार्यक्रम का क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वास्थ्य अथॉरिटी की ओर से किया जाएगा। स्थानीय पुलिस, राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पैनलबद्ध अस्पतालों के समन्वय से योजना को धरातल पर उतारा जाएगा। विस्तृत गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है- प्रवीण चौधरी, सीएमओ, हमीरपुर।