फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rampur Bushahar News: किन्नौर में ग्लेशियर झील फटने के जोखिम और तैयारी पर मंथन

विज्ञापन
विज्ञापन
अतिरिक्त सचिव (राजस्व) निशांत ठाकुर ने किया कार्यशाला का शुभारंभ
विज्ञापन

वैज्ञानिक जोखिम आकलन और मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के महत्व पर जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), किन्नौर ने कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला ग्लेशियर झील फटने के जोखिम और तैयारी पर केंद्रित रही। इसका उद्देश्य किन्नौर के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झील फटने से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
कार्यशाला का शुभारंभ हिमाचल प्रदेश सरकार के अतिरिक्त सचिव (राजस्व) निशांत ठाकुर ने किया। उन्होंने जलवायु-प्रेरित आपदाओं से उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला। ठाकुर ने वैज्ञानिक जोखिम आकलन और मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने संस्थागत तैयारी और अंतर एजेंसी समन्वय को आवश्यक बताया। उन्होंने जिले में आपदा तैयारी बढ़ाने में सभी एजेंसियों के सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना की। कार्यशाला का समापन वैज्ञानिक निगरानी, संस्थागत तैयारी और सामुदायिक जागरूकता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इसका लक्ष्य किन्नौर जिले में जीवन, आजीविका और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना है।
विज्ञापन

आईआईटी भुवनेश्वर के डॉ. अशिम सत्तार ने ग्लेशियर झील फटने खतरे के आकलन और प्रारंभिक चेतावनी तकनीक की जानकारी दी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के सेवानिवृत्त उप निदेशक डॉ. राजेश माली ने मौसम पूर्वानुमान के महत्व को रेखांकित किया। राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. परमानंद ने ग्लेशियर गतिशीलता और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर बात की।
विज्ञापन


कार्यशाला में जिला परिषद किन्नौर के अध्यक्ष हाकिम चंद, आईटीडीपी किन्नौर के परियोजना अधिकारी घनश्याम, सहायक आयुक्त विपिन कुमा, भारतीय सेना, आईटीबीपी, जलविद्युत परियोजनाओं और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें