मघारा स्कूल प्रबंधन समिति और पंचायत प्रतिनिधियों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
मुख्यमंत्री से स्कूल को यथावत रखने का किया आग्रह, वर्ना विद्यार्थियों की बढ़ेंगी दुश्वारियां
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। प्रदेश सरकार के एक से दस विद्यार्थियों वाले प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को मर्ज करने के फरमान से लोगों में रोष है। सरकार के इस फैसले के बाद सैकड़ों अभिभावकों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी परेशानियों में डाल दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को राजकीय माध्यमिक पाठशाला स्कूल प्रबंधन समिति का एक प्रतिनिधिमंडल पंचायत प्रधान दोफदा त्रिलोक चंद की अध्यक्षता में एसडीएम रामपुर निशांत तोमर से मिला। इस दौरान एसडीएम के जरिये मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा और गुहार लगाई कि मघारा स्कूल को यथावत रखा जाए।
ज्ञापन में उन्होंने कहा कि राजकीय माध्यमिक पाठशाला मघारा में विद्यार्थियों की संख्या दस है। सरकार की ओर से स्कूल को बंद या मर्ज करने के फरमान के बाद स्कूल प्रबंधन समिति और ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल के मर्ज होने से स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। स्कूल बंद होने से विद्यार्थियों को चार किलोमीटर दूर दोफदा जाना पड़ेगा। इस बीच में करीब डेढ़ किलोमीटर तक बड़ा पहाड़ (ढांक) है, जिससे लगातार पत्थर गिरते रहते हैं। पहले भी कई बार ग्रामीण यहां बाल-बाल बचे हैं। वहीं, इस सफर के बीच में दो नाले भी पड़ते हैं। यहां से लोग खतरे के साये में आवाजाही करते हैं। उच्ची नाले में करीब दो वर्ष पूर्व एक ट्रक बह गया था। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने सरकार, प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग उठाई है कि भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मघारा स्कूल को मर्ज या बंद न किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि स्कूल मर्ज या बंद किया गया, तो इससे साथ लगते प्राथमिक स्कूल पर भी विपरीत असर पड़ेगा। पांचवीं पास करने बाद इतनी दूरी तय करना छोटे बच्चों को भी परेशानियां पेश आएंगी। इस मौके पर यशोदा, मीना, दीपक, चरण दास, राजकुमार, सुनील, प्रेमकली, पदम, निर्मला, श्याद दासी, कौंई देवी, गुड्डी देवी, मुनी लाल, शकुंतला, डोलमा, मानदासी, सुषमा, कृष्णा, मीरा, बानू, हीरा, बबली, बिमला, रक्षा और लता सहित कई अन्य अभिभावक मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने निजी स्कूलों पर भी निशाना साधा
वहीं एसएमसी और ग्रामीणों की आपातकालीन बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सरकार के इस फैसले को लेकर भारी रोष जताया गया। बैठक में ग्रामीणों ने निजी स्कूलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई निजी स्कूल सरकारी स्कूल से कुछ दूरी पर चल रहे हैं, जो कि नियमों के खिलाफ है। कई निजी स्कूल नियमों को पूरा न करने के बाद भी चल रहे हैं। इन्हें तुरंत बंद करना चाहिए, ताकि सरकारी स्कूल के बच्चों की संख्या बढ़ सके।