रविवार को 80 मरीजों का हुआ उपचार, सैकड़ों मरीज उठा चुके स्वाथ्य लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर के आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्मा और क्षारसूत्र आयुर्वेदिक पद्धतियों के साथ आयुर्वेदिक कर्मों के जरिये मरीजों का उपचार किया जा रहा है। जिला किन्नौर से रामपुर पहुंचे डॉ. कपिल शर्मा कई रोगों का अनुशस्त्र आयुर्वेदिक कर्मों के माध्यम से उपचार कर रहे हैं। आयुर्वेद पद्धति से उपचार करवाने के लिए किन्नौर, लाहौल-स्पीति, शिमला और कुल्लू जिले से मरीज रामपुर के आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंच रहे हैं। रविवार को विशेष कार्यशाला के दौरान 80 मरीजों का उपचार किया गया। इस विशेष कार्यशाला में पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों से मरीजों का उपचार किया गया। इसमें अलाबू चिकित्सा, जलौका से रक्तमोक्षण, धातु स्वेद, मृतिका स्वेद, बिंदु अग्निकर्म, विलेखन अग्निकर्म और प्रतिसारण अग्निकर्म जैसी सूक्ष्म और प्रभावी आयुर्वेदिक क्रियाएं शामिल रहीं। आयुर्वेदिक अस्पताल रामपुर में हाल ही में आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार की प्रक्रिया शुरू हुई है। किन्नौर जिले से स्थानांतरण के बाद रामपुर पहुंचे डॉ. कपिल शर्मा ने मरीजों का विभिन्न पद्धतियों से उपचार करना शुरू किया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य आमजन को आयुर्वेद की इन प्राचीन और उपयोगी उपचार विधियों से जोड़ना है। आयुर्वेदिक उपचार पद्धति से सैकड़ों वर्षों से उपचार किया जा रहा है। आयुर्वेदिक अस्पताल रामपुर निरंतर प्रयासरत है कि प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों से आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का उपचार संभव किया जा सके।
इन रोगों का उपचार
अस्पताल में अग्निकर्म (ताप चिकित्सा) से संधिवात (घुटनों, कमर, कंधे आदि का दर्द), अन्निल वात (साइयटिका), कटिशूल (लोअर बैक पेन), अर्बुद (गांठ/ट्यूमर), हील स्पर, कालवेदीका (टेनिस एल्बो), माइग्रेन, गर्दन और कंधे के जकड़ाव की बीमारी, रक्तमोक्षण से जलौकावचारण, सिरा वेधन (नस की सफाई) से त्वचा रोग (सोरायसिस, एक्ज़िमा, एलर्जी) और वातरक्त (गठिया) का उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, मुंहासे व चेहरे के दाग, आंखों की सूजन, नसों में सूजन जैसे रोगाें का उपचार किया जा रहा है। आलाबू चिकित्सा ( कपिंग थैरेपी) से मांसपेशियों का दर्द, स्पॉन्डिलाइटिस, श्वसन रोग (दमा, ब्रोंकाइटिस), खेल के दौरान आईं चोटें और नसों में जकड़न जैसे रोगों को उपचार किया जा रहा है। विद्ध चिकित्सा (सुई द्वारा छेदन) पद्धति से अर्धांगवात (लकवा), साइटिका, मांसपेशियों में गांठ, त्रिजेमिनल न्यूराल्जिया (चेहरे में झनझनाहट व दर्द), स्वेदन ( स्टीम थेरेपी) की पत्र पिंड स्वेद, बालू स्वेद और मृत्तिका स्वेद (मिट्टी से) जोड़ों का दर्द, सर्दी-जुकाम, मोटापा जनित दर्द, पक्षाघात और गठिया रोग का उपचार किया जा रहा है। विलेखन अग्निकर्म (चीर कर अग्नि से चिकित्सा) से मस्से, गांठें, पुरानी फुंसियां, त्वचा के छोटे ट्यूमर, पुराने नासूर जख्मों का उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा अस्पताल में भगंदर, बवासीर, नाड़ीव्रण, अपक्व व्रण (फोड़े) न भरने वाला जख्म, गर्भाशय की गांठों का भी उपचार किया जा रहा है।
रामपुर में आयुर्वेद पद्धति से मरीज का उपचार करते डॉ. कपिल शर्मा। स्रोत : विभाग