.दो दशक से नहीं सुधर रही सड़क के साढ़े सात किलोमीटर हिस्से की हालत
.लोक निर्माण मंत्री के आश्वासन के बाद भी जस की तस समस्या
.करीब नौ गांव के हजारों लोगों को झेलनी पड़ रही परेशानी
.सरकार और लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली को लेकर रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थल सराहन और मां भीमाकाली माता मंदिर को जोड़ने वाली नानण-नवारू-बौंडा वैकल्पिक सड़क की हालत बेहद खराब है। सड़क पर सफर करना जोखिमभरा बना हुआ है। करीब दो दशक से सड़क के साढ़े सात किलोमीटर लंबे हिस्से की बदतर हालत नहीं सुधर रही है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के आश्वासन के बाद भी समस्या जस की तस है। क्षेत्र के नौ गांवों के हजारों ग्रामीण खतरे के साये में सफर करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों में सरकार और लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली को लेकर रोष है। ग्रामीणों में अमोलक राम, हरी, भजन सिंह नेगी, बुद्धि राम, अमरजीत पालसरा, महेंद्र सिंह नेगी, हरी सिंह मेहता, महिला मंडल अध्यक्ष कृति देवी, सचिव शीला देवी और माया देवी का कहना है कि सरकार के विकास के दावों के बीच आज भी कुछ गांव ऐसे हैं, जहां सड़कें नहीं हैं। नानण, नवारू, नैणी, घराली, बधाल, पमड़ाली, फले, उरमण, श्रीकन, गसाह और बौंडा गांवों के हजारों ग्रामीणों को लाभान्वित करने वाली यह सड़क 20 साल से कच्ची और बदहाल हालत में है। सड़क के दोनों किनारों पर बनाई गई सुरक्षा दीवारें जगह–जगह ढही हुई हैं। ग्रामीणों ने कहा कि कई बार प्रशासन से लेकर, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से भी मिल चुके हैं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी ज्यूरी से सराहन मुख्य सड़क बंद होती है, तो वाहनों की आवाजाही के लिए इसी सड़क का उपयोग किया जाता है। इसके बावजूद सरकार और विभाग इस महत्वपूर्ण सड़क की पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार और विभाग से सड़क को प्राथमिकता के आधार पर पक्का करने, सुरक्षा दीवारों का पुनर्निर्माण करने और पानी निकासी की उचित व्यवस्था करने की मांग उठाई है। चेताया है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
सड़क पर आ जाता है नाले का पानी, घरों को खतरा
नानण गांव के समीप नाले के पास लाखों रुपये की लागत से महिला मंडल भवन का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन नाला पार करने वाला कलवर्ट सड़क स्तर से नीचे होने के कारण बरसात में नाले का पानी अत्यधिक बढ़ जाता है और कलवर्ट के नीचे फंसकर बाहर नहीं निकल पाता। परिणामस्वरूप पानी सड़क पर फैल जाता है और सड़क तालाब में बदल जाती है। इससे महिला मंडल भवन और आसपास के घरों के लिए खतरा उत्पन्न हो जाता है।
दो दशक से नानण-नवारू-बौंडा सड़क पर नहीं हुई टारिंग, ग्रामीण परेशान। संवाद