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Rampur Bushahar News: कभी तंबुओं से शुरू हुआ कारोबार, आज करोड़ों की मार्केट बना ज्यूरी बाजार

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ज्यूरी बाजार में खरीदारी करते लोग। संवाद
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हिंदोस्तान-तिब्बत मार्ग पर ठहराव का मुख्य स्थान था ज्यूरी
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कभी चंद कारोबारियों की सजती थीं दुकानें, आज तीन किलोमीटर तक फैली मार्केट

12 पंचायतों के मुख्यालय में कृषि, बागवानी, भवन निर्माण, शिक्षा और जरूरत का हर सामान उपलब्ध

मोहन मेहता

ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। एक वो दौर था, जब ज्यूरी में तंबुओं से कारोबार होता था, लेकिन बदलते दौर के साथ यहां व्यापारिक गतिविधियां तेजी से बढ़ीं। कभी चंद कारोबारियों से सजने वाला ज्यूरी बाजार आज करीब तीन किलोमीटर के दायरे तक फैला है। क्षेत्र के दुर्गम इलाकों से लोग यहां खाद्य सामग्री और अन्य जरूरतों के सामान के लिए पहुंचते थे। आज के दौर में यहां जरूरत का हर सामान उपलब्ध है। नेशनल हाईवे-पांच से सटे इस बाजार में खाने-पीने से लेकर सभी प्रकार का सामान लोगों को आसानी से मिल जाता है। छह दशक पहले ज्यूरी बाजार का स्वरूप कुछ भी नहीं था। साल 1962 में भारत-चीन युद्ध से पहले ज्यूरी तक ही जीप योग्य सड़क थी। इससे आगे देश सीमा की ओर सड़क नहीं बनी थी। युद्ध के बाद भारत सरकार ने देश सीमा और सीमांत क्षेत्रों को सड़क सुविधा से जोड़ने की शुरुआत की। यही दौर था, जब ज्यूरी में तंबुओं के जरिये व्यापार शुरू हुआ। भारत-तिब्बत मार्ग पर चलने वाले यात्री यहां ठहरते थे, जबकि क्षेत्र के दुर्गम इलाकों का ज्यूरी केंद्र था। यहीं पर दुर्गम क्षेत्र 15/20 की छह पंचायतों और उप तहसील सराहन की चार पंचायतों से लोग रोजमर्रा के सामान, राशन सामग्री और अन्य जरूरतों का सामान खरीदते थे। इसके बाद जैसे ही देश सीमा को जोड़ने के लिए सड़क निर्माण हुआ और वाहनों की आवाजाही शुरू हुई, तो ज्यूरी में व्यापार गतिविधियां बढ़ने लगीं। किन्नौर की ओर जाने वाली हर बस और अन्य वाहन ज्यूरी में जरूर रुकते थे। यहां स्थित विभिन्न ढाबों में यात्री भोजन करते थे। बाजार में जहां एक दौर में सिर्फ खाने-पीने की वस्तुओं का कारोबार होता था, वहीं आज के दौर में यहां सूई से लेकर वाहनों के कलपुर्जे तक उपलब्ध हैं। इसके अलावा यहां रोजाना हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। बाजार में खाद्य सामग्री, कृषि, बागवानी, रेडीमेड कपड़े, शादी समारोह, भवन निर्माण, मोटर मेकेनिक सहित अन्य कई तरह की दुकानें हैं। वर्तमान में ज्यूरी बाजार क्षेत्र की 10 पंचायतों का मुख्यालय है। यहां स्थित विभिन्न बैंक, इंजीनियरिंग कॉलेज, स्कूल, विभिन्न विभागों के दफ्तर, भेड़ प्रजनन केंद्र, आईटीबीपी और सीमा सड़क संगठन का मुख्यालय भी स्थित है। रोजाना हजारों की संख्या में यहां लोग पहुंचकर खरीदारी करते हैं। रामपुर के पर्यटन स्थल सराहन, किन्नौर और काजा के विभिन्न पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले पर्यटक ज्यूरी जरूर रुकते हैं। दिन-प्रतिदिन ज्यूरी की मार्केट में विस्तार होता जा रहा है, लेकिन यहां आने वाले लोगों और कारोबारियों की सुविधाओं को देखते हुए अभी भी कई जरूरतें महसूस की जा रही हैं।



नाथपा-झाकड़ी जल विद्युत परियोजना निर्माण से बढ़ा व्यापार

वर्ष 1990 में देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत 1500 मेगावाट नाथपा-झाकड़ी परियोजना का निर्माण हुआ। इसके बाद ज्यूरी बाजार में कारोबार ने रफ्तार पकड़ी। नाथपा और झाकड़ी के बीच केंद्र होने के कारण ज्यूरी बाजार के कारोबार में अपेक्षा से अधिक इजाफा हुआ। परियोजना निर्माण में लगीं बड़ी-बड़ी देसी और विदेशी कंपनियों के कारण आज ज्यूरी बाजार करीब तीन किलोमीटर तक फैल गया है।
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कारोबारी बोले



-व्यापार मंडल ज्यूरी प्रधान जयप्रकाश धंगल ने बताया कि एक दौर में अधिकतर खाद्य सामग्री का कारोबार था। दूरदराज के क्षेत्रों से लोग खरीदारी करने पहुंचते थे। अब ग्रामीण क्षेत्रों से खाद्य सामग्री के लिए कम संख्या में पहुंच रहे हैं। हालांकि, ज्यूरी बाजार के व्यापार में लगातार इजाफा होता जा रहा है। आधुनिकता के दौर में हो रही ऑनलाइन शॉपिंग से कारोबार प्रभावित हो रहा है।



-ज्यूरी में 1970 के दशक से कारोबार कर रहे अजय सुनेल ने बताया कि ज्यूरी बाजार में वर्ष-दर-वर्ष कारोबार बढ़ा है। व्यापारियों और यहां आने वाले लोगों की सुविधाओं को देखते हुए ज्यूरी को नगर पंचायत का दर्जा मिलना चाहिए, ताकि कारोबारियों सहित लोगों को विभिन्न सुविधाएं मिल सके।



-कारोबारी यादवेंद्र ने कहा कि ज्यूरी बाजार में समय के साथ व्यापार गतिविधियां काफी बढ़ी हैं। देश की सबसे बड़ी भूमिगत जल विद्युत परियोजना नाथपा-झाकड़ी के निर्माण के दौरान ज्यूरी बाजार का रिकॉर्ड स्वरूप बढ़ा था और यहां के कारोबार को पंख लगे थे।
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-ज्यूरी बाजार ज्वेलर पंकज सोनी ने बताया कि बाजार में आभूषणों की दुकानें पहले की अपेक्षा बढ़ी हैं। आभूषणों की दुकानों का कारोबार सेब के उत्पादन पर काफी हद तक निर्भर करता है। ज्यूरी में पार्किंग की उचित सुविधा न होने के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। यहां पार्किंग की सुविधा होनी जरूरी है।

ज्यूरी बाजार में खरीदारी करते लोग। संवाद

ज्यूरी बाजार में खरीदारी करते लोग। संवाद

ज्यूरी बाजार में खरीदारी करते लोग। संवाद

ज्यूरी बाजार में खरीदारी करते लोग। संवाद

ज्यूरी बाजार में खरीदारी करते लोग। संवाद

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